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Saturday, 27 May 2023

फ्रीलांस राइटिंग या स्वतंत्र लेखन क्या है?

Freelance Writing स्वतंत्र लेखन

 

परिचय
Introduction


अगर शाब्दिक अर्थ की बात करें तो अंग्रेजी भाषा के शब्द फ्रीलांसर (freelancer) में फ्री का अर्थ है स्वतंत्र और लांसर का अर्थ है भालाधारी सैनिक।

If we talk about the literal meaning, then in the English language word freelancer, free means free and lancer means javelin or spear-wielding soldier.


यूरोप में मध्य युग में फ्रीलांसर शब्द ऐसे स्वतंत्र भालाधारी सैनिक के लिए प्रयोग किया जाता था जो  किसी एक राजा का सैनिक नहीं होता थाबल्कि जो उसे धन देता था वह उस राजा के लिए लड़ता था।

In Europe in the Middle Ages the term freelancer was used to refer to a free spear-wielding soldier who was not a soldier of a king, but who fought for that king who gave him money.


बाद में यह शब्द पत्रकारिता में आ गया। इस प्रकार पत्रकारिता में फ्रीलांसर या फ्रीलांस राइटर एक ऐसा लेखक होता है जो किसी एक प्रकाशन के लिए किसी स्थायी कर्मचारी के रूप में प्रतिबद्ध नहीं होता है। वह किसी संस्थान का कर्मचारी नहीं होता हैबल्कि वह किसी ग्राहक या प्रकाशन संस्थान की जरूरत या दिए गए प्रोजेक्ट के आधार पर काम करता है।

Later this word came in journalism. Thus in journalism a freelancer or freelance writer is a writer who is not committed to a single publication as a permanent employee. He is not an employee of any institution rather he works on the basis of the need or given project of a client or publishing institution.


फ्रीलांस राइटर स्वरोजगार आधार पर काम करता है। वह किसी एक प्रकाशक के लिए भी काम कर सकता हैलेकिन ज्यादातर वह एक समय में कई प्रकाशकों के लिए लिखने का काम करता है।

Freelance writer works on self-employment basis. He may also work for a single publisher, but most often he works for multiple publishers at the same time.


फ्रीलांस राइटर को हम स्वतंत्र कारोबार स्वामी भी कह सकते हैं।

We can also call Freelance Writer as 'Independent Business Owner'.


फ्रीलांस राइटिंग या स्वतंत्र लेखन रचनात्मक और तकनीकी हो सकता हैलेकिन दोनों में ही यह छोटी अवधि की प्रतिबद्धता होती है। रचनात्मक लेखन में पहले लेखक लिखता है और उसके बाद प्रकाशक ढूंढता हैजबकि तकनीकी लेखन में किसी प्रोजेक्ट के लिए पहले लेखक चुना जाता है और उसके बाद लेखन का कार्य होता है।

Freelance writing can be creative and technical, but both involve a short-term commitment. In creative writing, the author first writes and then the publisher is found, whereas in technical writing, the author is selected first for a project and then the task of writing takes place.


स्वतंत्र लेखकों की जरूरत
Freelance writers needed


1.    स्वतंत्र लेखकों की जरूरत इसलिए पड़ती है क्योंकि विशिष्ट विषयों पर लिखने के लिए प्रत्येक प्रकाशन संस्थान के पास पूर्णकालिक लेखक नहीं होते हैं।

Freelance writers are needed because not every publishing house has full-time writers to write on specific topics.


2.    सभी जगहों पर कुछ प्रोजेक्ट्स ऐसे होते हैं जिनकी हर समय जरूरत नहीं पड़ती है। इसलिए ऐसे प्रोजेक्ट के लिए स्थायी कर्मचारी नहीं नियुक्त किए जाते हैं। जब भी ऐसे प्रोजेक्ट करने होते हैं तो स्वतंत्र लेखकों की मदद ली जाती है।

There are some projects everywhere that are not needed all the time. Therefore, permanent employees are not appointed for such projects. Whenever such projects have to be done, the help of independent writers is taken.


3.    बहुत से संस्थान अपने काम में विविधता और बदलाव चाहते हैं। स्वतंत्र लेखक की सेवाएं लेने से लेखन में शैली और विषयों की विविधता देखने को मिलती है। 

Many institutions want diversity and change in their work. Hiring the services of a freelance writer allows for a diversity of styles and themes in writing.


4.    स्वतंत्र लेखकलेखक होने के साथ ही पाठक भी होता है। जिस संस्थान के लिए वह लिखता हैवहां छपने पर वह अपने लिखा पढ़ता भी है। बहुत से प्रकाशन संस्थान इसीलिए विभिन्न विषयों पर लिखने वाले लेखकों का स्वागत करते हैं क्योंकि इससे एक तो लेखन में विविधता प्राप्त होती है और दूसरे लिखने वाले पाठक के रूप में भी प्रकाशन संस्थान से जुड़ जाते हैं।

A freelance writer is a writer as well as a reader. He also reads his own writings when published in the institute for which he writes. Many publishing institutes welcome writers writing on different subjects because it gives variety to the writing and on the other hand, the writers also join the publishing institute as readers.

 


स्वतंत्र लेखक होने के नुकसान
Disadvantages of being a freelance writer

1.    स्वतंत्र लेखक या फ्रीलांस राइटर के काम में नियमित आमदनी नहीं होती है।

There is no regular income in the work of freelance writer or freelance writer.

2.    चूंकि स्वतंत्र लेखक किसी संस्थान का कर्मचारी नहीं होताइसलिए उसे मासिक वेतन नहीं मिलता है।

Since the freelance writer is not an employee of an organization, he does not get a monthly salary.


3.    स्वतंत्र लेखक के बीमार होने या काम से छुट्टी करने पर कोई पैसा नहीं मिलता है।

No money is paid when a freelance writer is sick or off work.


4.    कई बार प्रोजेक्ट पूरा कर देने पर भी भुगतान में काफी समय लग जाता है।

Sometimes the payment takes a long time even after completing the project.


5.    शुरू में पहचान बनाने के लिए काफी मशक्कत करनी होती है। लेखक के रूप में पहचान बनने तक पैसा भी कम मिलता है।

It takes a lot of effort to make an identity in the beginning. The money is also less till you become recognized as a writer.

 

स्वतंत्र लेखक होने के फायदे
Benefits of being a freelance writer


1.    स्वतंत्र लेखक को काम के लिए दफ्तर की तरह सुबह नौ बजे से शाम पांच बजे की बंदिश नहीं होती।

The freelance writer does not have the restriction of 9 in the morning to 5 in the evening for work like in the office.

2.    अपने काम करने के घंटे स्वतंत्र लेखक स्वयं तय करता है।

The freelance writer sets his own working hours.


3.    वह सुबहदोपहरशाम या रातमनचाहे तरीके से काम कर सकता है।

He can work in the morning, afternoon, evening or night, any way he wants.


4.    वह प्रकाशन संस्थान को चुनने के लिए स्वतंत्र होता है।

He is free to choose the publishing house.


5.    स्वतंत्र लेखक के पास घर पर ही दफ्तर बनाने की सुविधा होती है।

Freelance writers have the facility to set up an office at home.


6.    काम करने का वातावरण वह स्वयं निर्मित कर सकता हैजो परंपरागत दफ्तर में संभव नहीं है।

He can create his own working environment, which is not possible in a traditional office.


7.    स्वतंत्र लेखक कभी भी काम से छुट्टी ले सकता है।

A freelance writer can take a break from work at any time.


8.    उसका कोई मालिक नहीं होताइसलिए उसे बॉस या वरिष्ठों की कड़वी बातें नहीं सुननी पड़तीं।

He has no boss, so he does not have to listen to bitter words from the boss or superiors.

 

स्वतंत्र लेखक के ग्राहक या स्वतंत्र लेखन के मंच
Freelance writer’s clients or freelance writing forums

 

स्वतंत्र लेखक को कई मंचों (प्लेटफार्म) पर काम करने का मौका मिलता है। इनमें प्रमुख मंच निम्न प्रकार हैं-

Freelance writers get a chance to work on multiple platforms. The main platforms among them are as follows-

 

  • अखबारपत्रिकाओं में फीचरलेखरिपोर्टरिपोर्ताजस्पेशल स्टोरीसमीक्षाकहानी आदि लिखना

Writing feature, article, report, reportage, special story, review, story etc. in newspapers and magazines

  • अपने या दूसरे के ब्लॉग पर लिखना।

Writing on your own or someone else's blog

  • वेबसाइटों के लिए कंटेट लेखक के तौर पर काम करना।

Working as a content writer for websites

  • प्रोफेशनल लेखक के रूप में पुस्तकेंलेख आदि लिखना।

Writing books, articles etc as a professional writer

  • सर्च इंजनों के लिए एसईओ (SEO) लेखक के तौर पर काम करना।

Working as an SEO writer for search engines

  • सोशल मीडिया एकाउंटों की देखरेख करना।

Maintaining social media accounts

  • वेब के लिए कॉपी लेखनप्रेस विज्ञप्ति लेखन आदि लिखना।

Writing copy writing, press release writing, etc. for the web.

  • विज्ञापन कंपनियों के लिए बतौर कॉपी लेखक सेवाएं देना या जिंगल आदि लिखना।

Providing services as a copywriter for advertising companies or writing jingles etc

  • पुस्तकोंलेखों आदि का एक भाषा से दूसरी भाषा में अनुवाद करना।

Translating books, articles, etc. from one language to another

  • रेडियो के लिए विभिन्न विधाओं में लेखन।

Writing in various genres for radio

  • टीवी पर धारावाहिकों और रियलिटी शो के लिए स्क्रिप्ट लेखन।

Script writing for TV serials and reality shows

  • फिल्मों के लिए स्क्रिप्ट या संवाद लेखन आदि।

Script or dialogue writing for films etc

 

 

स्वतंत्र लेखक की विशेषताएं/गुण
Characteristics of a freelance writer


साहस
Bravery

स्वतंत्र लेखन करने के लिए किसी भी व्यक्ति में साहस का होना बहुत जरूरी है। चूंकि स्वतंत्र लेखन में एकदम पैसा नहीं मिलतानियमित आमदनी नहीं होतीइसलिए संघर्ष करना स्वाभाविक हो जाता है। समाज को भी समझाना होता हैक्योंकि नाते-रिश्तेदारपरिजन आदि पूछते हैं कि आप क्या काम कर रहे हैं। बहुत से लोग स्वतंत्र लेखन के बारे में ज्यादा नहीं जानतेइसलिए वे स्वतंत्र लेखक को काम ढूंढ रहे व्यक्ति यानी बेरोजगार की तरह ही देखते हैं।

It is very important for any person to have courage to do freelance writing. Since freelance writing doesn't bring instant money, no regular income, it's natural to struggle. Society also has to be explained, because relatives etc. ask what work you are doing. Many people do not know much about freelance writing, so they see freelance writers as a job seeker.

 

अध्ययनशील
Studious

स्वतंत्र लेखन को बहुत ही अध्ययनशील होना चाहिए। इसके बिना उसका गुजारा नहीं है। निरंतर अध्ययन से ही लेखक को नए विचारसूचनाएंजानकारियां आदि मिलती हैं जो उसके लेखन में सहायक बनती हैं।

Freelance writing has to be very studious. He cannot survive without it. It is only through continuous study that the writer gets new ideas, information etc., which become helpful in his writing.

 

सूचनाओं का संग्रह करने की आदत 
Habit of collecting information

स्वतंत्र लेखक को अपने विषय से संबंधित सूचनाओं का संग्रह करना बहुत जरूरी होता है। इसलिए स्वतंत्र लेखक में यह आदत होनी चाहिए कि अपने विषय से संबंधित जो भी नई और महत्वपूर्ण जानकारी मिले उसे या तो डायरी में दर्ज करे या संबंधित सूचना की कतरन को काटकर किसा फाइल में लगा ले। इससे लेखक को बाद में लेखन कार्य करते समय बहुत लाभ होता है।

It is very important for a freelance writer to collect information related to his subject. Therefore, it should be a habit in the freelance writer that whatever new and important information is found related to his subject, he should either enter it in the diary or cut the clipping of the related information and put it in the file. This gives a lot of benefit to the writer while doing the writing work later.

 

लेखन क्षमता और भाषा पर नियंत्रण
Writing ability and language control

अगर लिखने की क्षमता ही नहीं होगी तो कोई व्यक्ति स्वतंत्र लेखक या किसी भी प्रकार का लेखक नहीं बन सकता है। लेखन क्षमता के साथ ही स्वतंत्र लेखक को सरल शब्दों को सहज और सरल वाक्यों में पिरोना आना चाहिए। ऐसा होने पर ही उसका लेखन ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचेगा और उसे सराहना मिलेगी।

If there is no ability to write then a person cannot become a freelance writer or any kind of writer. Along with writing ability, the freelance writer should be able to put simple words in simple sentences. Only then will his writing reach as many people as possible and he will be appreciated.

 

विविधता
Diversity/ Variety

स्वतंत्र लेखक के लेखन में विविधता का होना बहुत ही जरूरी है। लेखन में जितनी ज्यादा विविधता होगीउतना ही उसके प्रकाशित होने के ज्यादा अवसर बनेंगे और उतना ही ज्यादा भुगतान मिलने की संभावना बनेगी।

Variety is very important in the writing of a freelance writer. The more variety the writing has, the more opportunities it has to get published and the more likely it will be paid.

 

धैर्य
Patient

स्वतंत्र लेखक का धैर्यवान होना भी बहुत जरूरी हैक्योंकि शुरू में बहुत ज्यादा मेहनत के बावजूद उसका पर्याप्त फल नहीं मिलता है।

It is also very important for a freelance writer to be patient, because in the beginning, despite a lot of hard work, it does not get enough results.


स्वतंत्र लेखक बनने की प्रक्रिया
The process of becoming a freelance writer

 

1.    स्वतंत्र लेखक बनने जा रहे किसी भी व्यक्ति को सबसे पहले लिखने के क्षेत्र या विषय का चुनाव करना होगा। इसी के साथ यह भी तय करना होगा कि किस मंच (अखबारपत्रिकारेडियोसोशल मीडिया आदि) के लिए लिखना है।

Anyone going to become a freelance writer must first choose a writing field or subject. Along with this, it will also have to be decided for which platform (newspaper, magazine, radio, social media etc.) to write for.

 

2.    विषय का चुनाव करने के बाद स्वतंत्र लेखक को अपनी लेखन क्षमता दिखाने के लिए नमूना लेख तैयार करने होंगे। इसके बिना किसी को उसकी लेखन क्षमता के बारे में नहीं पता चलेगा।

After selecting the topic, the freelance writer has to prepare sample articles to show his writing ability. Without this one would not know about his writing ability.

 

3.    स्वतंत्र लेखक को आज के समय में ऑनलाइन (फेसबुकट्विटर) उपस्थिति भी बनाए रखनी होगी ताकि उसके बारे में लोग जान सकें।

In today's time the freelance writer also has to maintain an online (Facebook, Twitter) presence so that people can know about him.

 

4.    इसके बाद स्वतंत्र लेखक के लिए पिचिंग करना भी जरूरी होता है। पिचिंग का अर्थ है लोगों को बताना कि आप क्या काम करते हैं या आप किस प्रकार की सेवाएं देते हैं। इसके लिए उसे अखबारपत्रिका आदि के संपादकोंफीचर संपादकों आदि से मिलकर अपने बारे में बताना होगा। ऑनलाइन प्लेटफार्म के लिए अपना विज्ञापन तैयार करना होगा या अपने प्रचार करना होगा।

After this, pitching is also necessary for a freelance writer. Pitching means telling people what work you do or what kind of services you provide. For this he has to meet the editors of newspaper, magazine etc., feature editors etc. and tell about himself. He will have to prepare advertisements for the online platform or promote himself.

 

- लव कुमार सिंह

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Thursday, 25 May 2023

#Economics यूनिकॉर्न कंपनी क्या है? फिनटेक सैक्टर क्या है?

What is a Unicorn Company?


General Knowledge- Economics 



यूनिकार्न कंपनी क्या होती है?  What is a Unicorn Company?

यूनिकार्न ऐसी स्टार्टअप कंपनियों को कहा जाता है जिनका मूल्यांकन एक अरब डॉलर या उससे अधिक होता है। मध्य अक्टूबर 2021 तक देश में एक अरब डॉलर से अधिक हैसियत वाले स्टार्ट अप की संख्या 70 से ज्यादा हो गई। 2014 तक देश में सिर्फ चार यूनिकॉर्न थे। अगस्त 2020 में यह संख्या 21 थी। 33 स्टार्ट अप तो 2021 में ही यूनिकॉर्न बने हैं। जहां  तक स्टार्ट अप की बात है तो स्टार्ट अप ऐसी नई कंपनी को कहते हैं जिसे स्केलेबल और रिपीटेबल बिजनेस मॉडल को प्राप्त करने के लिये बनाया जाता है। ये कंपनियां विकास के चरण में होती हैं। इनमें फंडिंग भी दोस्तों, पारिवारिक सदस्यों या बैंक लोन आदि के जरिये होती है। सफल रहने पर इन्हें बाद में निवेशक मिल जाते हैं। ये कंपनियां ऐसे उत्पाद या सेवा को प्रस्तुत करती हैं जो अभी तक बाजार में उपलब्ध नहीं थी। एक समय था जब दुनिया में डॉट कॉम बबल का दौर आया और बहुत सी नई डॉट कॉम कंपनियां बनी। उस समय इन्हें स्टार्ट अप कंपनियां कहा गया। इसके बाद नई कंपनियों के लिये यह शब्द प्रयोग होने लगा। लेकिन स्टार्ट अप के लिए केवल नई कंपनी ही होना पर्याप्त नहीं है। स्टार्ट अप कंपनी में अनूठे उत्पाद/सेवा, निजी फंडिंग के अलावा नया वर्क कल्चर भी होता है और इनमें कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए कर्मचारियों में कैजुअल एटीट्यूड को भी बढ़ावा दिया जाता है।


फिनटेक सेक्टर का क्या अर्थ है? इसमें किस क्षेत्र की कंपनियां आती हैं? What is meant by Fintech Sector? Which sector companies come in this?

फिनटेक (FinTec) फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी का संक्षिप्त रूप है। वित्तीय कार्यों में टेक्नोलॉजी के उपयोग को फिनटेक कहा जाता है। बैंकों की मदद से डिजिटल रूप में लेन-देन करने वाली कंपनियां इस क्षेत्र के अंतर्गत आती हैं। जैसे यूपीआई, भीम ऐप, पेटीएम, गूगल पे, मोबीक्विक, फ्रीचार्ज आदि। भारत इस समय फिनटेक कंपनियों का हब बन गया है। भारत में इस समय फिनटेक अपनाने की गति 87 प्रतिशत है जो वैश्विक गति (64 फीसदी) से भी बहुत अधिक है।


हवाई जहाज में पड़ने वाले ईंधन एटीएफ का पूरा नाम क्या है? What is the full form of Airplane Fuel ATF?

एटीएफ का पूरा नाम है- एविएशन टरबाइन फ्यूल। यह  इसलिये चर्चा में आया क्योंकि पिछले दिनों देश में पेट्रोल के दाम एटीेएफ से भी ज्यादा हो गए।

पहली बार किसी भारतीय को वर्ल्ड स्टील एसोसिएशन  का अध्यक्ष बनाया गया है। यह भारतीय कौन हैं? For the first time, an Indian has been made the President of the World Steel Association. Who are these Indians?

जेएसडब्लू स्टील लिमिटेड के सीएमडी सज्जन जिंदल को 2020-21 के लिये वर्ल्ड स्टील एसोसिएशन का अध्यक्ष चुना गया है। इस एसोसिएशन का गठन 1967 में हुआ था। इसका मुख्यालय बेल्जियम में है।

नागरिक विमानन मंत्रालय ने किस नई निजी एयरलाइंस को परिचालन की मंजूरी दी है? Which new private airline has been approved by the Civil Aviation Ministry to operate?

शेयर बाजार के दिग्गज निवेशक राकेश झुनझुनवाला की 'आकासा' एयरलाइंस को परिचालन की मंजूरी मिली है। इस प्रकार भारतीय हवाई क्षेत्र में 2022 की गर्मियों से एक नई एयरलाइंस की सेवा लोगों को मिलेगी।

इन दिनों देश में कोयला संकट की खबरें आ रही हैं। कोयले से संबंधित कुछ तथ्य जिन पर प्रश्न बनते हैं। These days there are reports of coal crisis in the country. Some facts related to coal on which questions are raised.

  • भारत में पहली बार किस इलाके में कोयले का औद्योगिक खनन हुआ? (उत्तर- पश्चिम बंगाल के रानीगंज के नारायणकुड़ी इलाके में 1774 में, ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा)
  • कोयले के उत्पादन और खपत में भारत का विश्व में कौन सा स्थान है? (उत्तर- भारत कोयले के उत्पादन और खपत, दोनों में चीन के बाद दूसरे नंबर पर है।)
  • दुनिया में कोयले के सबसे बड़े भंडार कहां पर हैं? (उत्तर- दुनिया में कोयले के सबसे बड़े भंडार अमेरिका, रूस, आस्ट्रेलिया, चीन और भारत में हैं।)
  • भारत के पास कितना कोयला भंडार है? (उत्तर- कोयला मंत्रालय के अनुसार भारत के पास 319 अरब टन कोयला भंडार है। 
  • भारत में कोयला भंडार वाले शीर्ष राज्य कौन से हैं? (उत्तर- झारखंड, उड़ीसा, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र कोयला भंडार के मामले में शीर्ष पर हैं।)

सीबीजी का पूरा नाम क्या है? वाहनों में इसे सीएनजी के स्थान पर क्यों प्रयोग किया जा रहा है? What is the full form of CBG? Why is it being used in place of CNG in vehicles?

सीबीजी का पूरा नाम है- कप्रेस्ड बायो गैस। सरकार अब सीएनजी यानी कंप्रेस्ड नेचुरल गैस के स्थान पर सीबीजी को तरजीह दे रही है। दरअसल सीबीजी, सीएनजी से सस्ती पड़ती है। इसका माइलेज भी अच्छा है। सीएनजी का स्रोत सीमित है, जबकि सीबीजी को पराली, कूड़े, गोबर, खेती की बची हुई सामग्री  आदि से बनाया जा सकता है जो देश में भरपूर मात्रा में है। इससे पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण की समस्या से भी छुटकारा मिलेगा।

सेबी यानी भारतीय प्रतिभूति विनिमय बोर्ड (सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) ने कौन से दो नये स्टॉक एक्सचेंज को गठित करने की मंजूरी दी है? Which two new stock exchanges have been approved by SEBI i.e. Securities Exchange Board of India? 

सेबी ने गोल्ड एक्सचेंज और सोशल स्टॉक एक्सचेंज के गठन को मंजूरी दी है।  गोल्ड एक्सचेंज में निवेशक अपने सोने के बदले प्राप्त इलेक्ट्रॉनिक रिसीट्स का कारोबार कर सकेंगे। इससे देश में सोने का कारोबार ज्यादा बेहतर तरीके से हो सकेगा। सोशल स्टॉक एक्सचेंज में एनजीओ को फंड जुटाने  की सुविधा मिलेगी।


सरकार वाहनों में फ्लेक्स फ्यूल इंजन को अनिवार्य करने की योजना बना रही है। फ्लेक्स फ्यूल इंजन क्या होता है? The government is planning to make flex fuel engines mandatory in vehicles. What is a Flex Fuel Engine?

जो इंजन एक से अधिक प्रकार के ईंधन से चलने योग्य हो, वह फ्लेक्स फ्यूल इंजन कहलाता है। यानी जो इंजन पेट्रोल/डीजल से भी चल जाए और एथनाल जैसे ईंधन  से भी चल जाए।


रिजर्व बैंक ने सितंबर 2021 के अंत में किस बैंक को पीसीए से बाहर कर दिया है? पीसीए क्या है? Which bank has been taken out of PCA by the Reserve Bank of India at the end of September 2021? What is PCA?

रिजर्व बैंक ने ओवरसीज बैंक को पीसीए के दायरे से बाहर कर दिया है। पीसीए यानी 'प्राम्प्ट करेक्टिव एक्शन'। इसे पीसीएएफ भी कहते हैं। एफ का अर्थ फ्रेमवर्क है। पीसीए एक फ्रेमवर्क या व्यवस्था है जिसके तहत किसी बैंक के कमजोर वित्तीय पहलुओं पर रिजर्व बैंक नजर रखता है। अगर कोई बैंक कैपिटल रेशियो, एसेट क्वालिटी और प्रॉफिटेबिलिटी जैसे मामलों में एक निश्चित सीमा के नीचे जाता है तो उस बैंक को जोखिम भरा माना जाता है। जो बैंक पीसीए के दायरे में रखा जाता है, उस पर रिजर्व बैंक कई तरह की पाबंदियां लगाता है, जैसे बैंक को नये लोन बांटने, शाखाएं खोलने, लाभांश देने समेत कई कदम उठाने से रोक दिया जाता है। इससे पहले रिजर्व बैंक ने यूको बैंक को भी पीसीए से बाहर किया था।

देश में बैड बैंक को किस नाम से जाना जाता है? By what name is the bad bank known in the country?

बैड बैंक का पूरा नाम नेशनल असेट रीकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड (एनएआरसीएल NARCL) है। हाल ही में सरकार ने बैड बैंक को 30,600 करोड़ रुपये देने की मंजूरी दी है ताकि बैड बैंक बैंकों के फंसे कर्ज (एनपीए) का अधिग्रहण कर सके। यहां बताते चलें कि बैड बैंक का काम किसी भी बैड असेट को गुड असेट में बदलने का होता है। आमतौर पर बैड बैंक एनपीए का 15 फीसदी नकद के रूप में संबंधित बैंक को देता है और 85 फीसदी के लिये सिक्योरिटी रिसीट देता है।

एवरग्रैंड संकट क्या है? यह दुनिया में चर्चा का विषय क्यों बना हुआ है? What is the Evergrand Crisis? Why is this a topic of discussion in the world?

एवरग्रैंड चीन की सबसे बड़ी रियल एस्टेट डेवलपर कंपनी है। चीन के बड़े-बड़े अपार्टमेंट, शाॉपिंग मॉल और ऑफिस में से अधिकांश इसने ही बनाए हैं। यह इस समय कंगाली के कगार पर पहुंच गई है। इसे चीन के निवेशक सहम गए हैं और वैश्विक शेयर बाजार में भी इसका असर देखने को मिल रहा है। रियल स्टेट कंपनियां चीन की अर्थव्यवस्था की रीढ़ रही हैं। यदि वे अपने कर्ज चुकाने में विफल रहती हैं तो इसका असर दुनिया भर में दिखने की आशंका है।


नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम क्या है, जिसे 22 सितंबर 2021 से शुरू किया गया है? What is the National Single Window System, which has been launched from 22nd September 2021?

जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, यह एकल खिड़की सिस्टम है। इस पर केंद्र सरकार के 18 विभाग और नौ राज्य अभी जुड़े हैं। आगे और विभाग और राज्य जुड़ेंगे। इस प्लेटफार्म के शुरू होने से अब कारोबारियों को किसी परियोजना के लिए अलग-अलग विभागों से मंजूरी नहीं लेनी पड़ेगी, बल्कि एक ही जगह आवेदन करने से उनका काम हो जायेगा।


- लव कुमार सिंह


Monday, 22 May 2023

फिपिक (FIPIC) कौन से देशों का संगठन है और क्यों चर्चा में है?

फिपिक (#FIPIC) कौन से देशों का संगठन है और क्यों चर्चा में है?



  • फिपिक का अर्थ है- फोरम ऑफ इंडिया-पैसिफिक आइलैंड कोऑपरेशन। यह भारत और प्रशांत महासागर के 14 द्विपी देशों का संगठन है। इन 14 द्विपीय देशों में शामिल हैं-  पापुआ न्यू गिनी, फिजी, कुक आइलैंड, क्रिबाती, मार्शल आइलैंड, माक्रोनेशिया, नौरू, नियू, सामाओ, सोलोमैन आइलैंड्स, पलाऊ, टोंगा, टुवालू, वनाउतू।
  • ये देश आस्ट्रेलिया के आसपास पाए जाते हैं।
  • 22 मई 2023 को फिपिक की शीर्ष बैठक पापुआ न्यू गिनी में हुई, जिसकी अध्यक्षता भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की।
  • इस दौरान नरेंद्र मोदी को फिजी और पापुआ न्यू गिनी का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भी दिया गया। फिजी ने मोदी को 'कम्पैनियन ऑफ द आर्डर ऑफ फिजी' से सम्मानित किया जबकि पापुआ न्यू गिनी ने 'ग्रेट कम्पैनियन ऑफ द आर्डर आफ लोगोहु' दिया।
  • उल्लेखनीय है कि इससे पहले मोदी को सऊदी अरब का सर्वोच्च सम्मान अब्दुल अजीज अल सउद, अफगानिस्तान का स्टेट ऑर्डर आफ गाजी आमिर अमानुल्लाह खान जैसे सम्मान भी मिल चुके हैं।

अन्य महत्वपर्ण तथ्य 

  • पापुआ न्यू गिनी की आधिकारिक भाषा 'टोक पिसिन' है।
  • तमिल क्लासिक 'थिरुक्कुरल' के टोक पिसिन में हुए अनुवाद का विमोदन भी मोदी ने किया।
  • 'थिरुक्कुरल' को कवि थिरुवल्लुवर ने लिखा था। इस ग्रंथ को तमिल में बहुत अहम स्थान प्राप्त है। इसमें विभिन्न् विषयों पर मूल्यवान अंतदृष्टि प्रदान की गई है।

- लव कुमार सिंह

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Wednesday, 17 May 2023

किसी भी परीक्षा में अच्छे अंक कैसे लाएं?

How To Get Good Marks



अनेक छात्रों के साथ यह देखने को मिलता है कि स्कूल, कॉलेज या विश्वविद्यालय स्तर की परीक्षा के लिए वे खूब मेहनत करते हैं, लेकिन फिर भी उनके उतने अंक नहीं आते, जितने की उन्हें आशा होती है। ऐसा भी देखने को मिलता है कि एक जैसी मेहनत करने वाले दो छात्रों के अंकों में काफी अंतर होता है।

ऐसा क्यों होता है? इस समस्या के पीछे मुख्य कारण यह है कि विषय को समझने और जरूरी चीजें याद कर लेने के बावजूद कुछ छात्र परीक्षा में स्वयं को सही से प्रस्तुत नहीं कर पाते। परीक्षा कक्ष में उत्तर देते समय उनसे कुछ ऐसी गलतियां हो जाती है, जिससे उनके अंक कम रह जाते हैं। किसी छात्र का थोड़ा कमजोर उत्तर भी बेहतर प्रस्तुति के कारण अच्छे अंक दिला सकता है और कई बार बेहतर उत्तर भी कमजोर प्रस्तुति के कारण वैसा काम नहीं कर पाता है।

इस समस्या को दूर करने के लिए छात्रों को परीक्षा कक्ष की रणनीति और उसके बाद कॉपी जांचने वाले परीक्षक की मनोस्थिति को समझना चाहिए और फिर उसी के अनुसार अपने उत्तर देने चाहिए। किसी भी छात्र को परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन के लिए निम्नलिखित बातों पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए-

1-    परीक्षक का मूड बना देती है अच्छी लेखनी


जब कोई परीक्षक किसी परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाएं जांचता है तो उसके और छात्र के बीच केवल एक ही संपर्क बिंदु होता है और वह है छात्र की लेखनी। सुंदर तरीके से लिखा गया थोड़ा कमजोर उत्तर भी छात्र को अच्छे अंक दिलवा सकता हैजबकि भद्दे तरीके से लिखा गया ठोस उत्तर भी नंबर कटवा सकता है। इसलिए परीक्षा में अच्छे अंक लाने के लिए अच्छी लेखनी बहुत जरूरी है।

2-    यदि लेखनी बहुत सुंदर नहीं है तो यह जरूर करें


  • लेखनी सुंदर नहीं है तब भी प्रत्येक शब्द और पंक्तियों के बीच में पर्याप्त जगह रखें ताकि प्रत्येक शब्द और पंक्ति परीक्षक को स्पष्ट नजर आए।
  • दो उत्तरों के बीच में भी थोड़ी जगह छोंड़ें ताकि साफ-साफ पता चले कि यह किस प्रश्न का उत्तर है।
  • जब किसी प्रश्न का उत्तर खत्म हो जाए तो उसे यूं ही न छोड़ेंबल्कि उसके नीचे एक लाइन खींच दें ताकि स्पष्ट नजर आए कि उत्तर यहां खत्म हो गया है। लाइन कागज के मध्य में दोनों तरफ स्थान छोड़कर खींचें। लाइन की जगह छोटे-छोटे पांच-छह गोलेबक्से या सितारे भी बना सकते हैं। इन संकेतों को बाद थोड़ी सी जगह छोड़ें और फिर अगले उत्तर को शुरू करें।
  • हर उत्तर को शुरू करने से पहले ऊपर मध्य में या बाएं तरफ अंकित करें कि यह किस प्रश्न का उत्तर है।
  • जहां भी जरूरी होवहां शीर्षक दें और उन्हें मोटे अक्षरों में लिखें या उनके नीचे लाइन खींचें।
  • ध्यान आकर्षित करने के लिए शीर्षकों को कैपिटल लेटर यानी मोटे अक्षरों में भी लिख सकते हैं।
  • जहां भी जरूरी होवहां चित्रग्राफ आदि का प्रयोग करें।
  • यदि किसी उत्तर में कई बिंदु हैं तो उन्हें एक साथ एक पंक्ति में न लिखकर अलग-अलग पंक्ति में ऊपर-नीचे क्रम संख्या डालकर लिखें।
  • उत्तरों के बीच में क्रम दिखाने के लिए उचित स्थानों पर अंकों या बुलेट का समुचित प्रयोग करें।
  • किसी खास वाक्य या बिंदु को अंडरलाइन करने से भी नहीं चूकें।

3-    मॉडल पेपर लेकर अभ्यास करें


ऊपर बताए गए सभी उपायों को अमल में लाने के लिए मॉडल पेपर लेकर घर पर उसका बिल्कुल परीक्षा की तरह अभ्यास करें। उत्तर लिखने के लिए पूरी सख्ती के साथ स्वयं को उतना ही समय देंजितना परीक्षा में मिलने वाला है। अक्सर ऐसा होता है कि जब हमें कम समय में ज्यादा लिखना होता है तो तेज लिखते समय हमारी लेखनी बिगड़ जाती है। घर में अभ्यास से तेजी से लिखने की आदत बनेगी और परीक्षा में लेखनी बिगड़ने की समस्या नहीं आएगी।

4-    वर्तनी की गलतियां न होने दें


परीक्षा में स्पैलिंग यानी वर्तनी की गलतियां बिल्कुल भी न होन दें। ऐसी गलतियां कागज पर एकदम से नजर आ जाती है और एक अच्छे उत्तर का भी गुड़गोबर कर देती हैं। वर्तनी की गलतियां देखकर परीक्षक के मस्तिष्क पर बहुत बुरा असर पड़ता है। ऐसी गलतियां उसे चिड़चिड़ा बना देती हैं। कुल मिलाकर ऐसी गलतियां होने से सही उत्तर होने पर भी अच्छे अंक नहीं मिल पाते हैं।

5-    परीक्षक फ्रेंडली उत्तर दें


परीक्षक को कॉपी जांचने में आसानी होती है तो छात्र को लाभ होता है। इसीलिए, उत्तरों का और उत्तर देने के तरीकों का परीक्षक के अनुकूल होना जरूरी है।
                         
दरअसलजिन उत्तरों को समझने और याद करने के लिए आप पूरे वर्ष कठिन मेहनत करते हैं और परीक्षा हाल में तीन घंटे जूझकर उत्तर देते हैंउन उत्तरों की उत्तर पुस्तिका का फैसला कुछ ही मिनटों में हो जाता है। परीक्षक के सामने कॉपियों का ढेर होता है और उन्हें एक कॉपी को जांचने के लिए कुछ ही मिनट मिलते हैं। ऐसे में क्या किया जाए कि छात्र अपने भविष्य के लिए मिले कुछ मिनटों में परीक्षक पर ऐसा प्रभाव छोड़ दें कि छात्र को अच्छे अंक ही मिलें।

इसका एक ही तरीका है कि आप प्रश्नों का इस प्रकार से दें कि आपकी कॉपी जांचते समय परीक्षक के मस्तिष्क पर कम से कम दबाब पड़े। आपकी कॉपी परीक्षक को चिड़चिड़ा न बनाए। कुल मिलाकर आपको अपने उत्तरों को परीक्षक फ्रेंडली बनाना है।

कॉपी जांचते समय परीक्षक के पास मॉडल उत्तर भी होते हैं। ऐसे में परीक्षक सामान्यतः उत्तरों को पूरा नहीं पढ़ते बल्कि यह देखते हैं कि जो कुछ उत्तर में लिखा गया है वह मॉडल उत्तर से कितना मिलता जुलता है। भाषा के प्रश्नपत्रों को छोड़कर ज्यादातर प्रश्नपत्रों में कमोबेश यही स्थिति होती है।

परीक्षक फ्रेंडली उत्तर देने के लिए आप परीक्षा हाल में निम्न तरीके अपनाएं-
जिस क्रम में प्रश्न हैंउसी क्रम में उत्तर दें- कुछ प्रश्नपत्र दो या तीन खंडों में बंटे होते हैंजबकि कुछ प्रश्नपत्रों में कोई खंड नहीं होता है। प्रश्नपत्र जैसा भी होआप कोशिश करें कि अपने उत्तरों का क्रम वही रखें जो क्रम प्रश्नपत्र का है। यदि प्रश्नपत्र खंडों में बंटा है तो आप पहले जवाब देने के लिए किसी एक खंड को चुन सकते हैंलेकिन आप जो भी खंड चुनें उसमें उत्तरों का क्रम न बदलें। उसी क्रम में उत्तर दें जिस क्रम में प्रश्न आए हैं। प्रश्नपत्र जैसा ही उत्तरों का क्रम देखकर परीक्षक को बड़ी राहत मिलती है। इससे परीक्षक को उत्तर की पहचान करने में बिल्कुल भी देरी नहीं लगती और उसका काम आसान हो जाता है।

उत्तर के महत्वपूर्ण अंश को अंडरलाइन कर दें- प्रत्येक उत्तर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। किसी भी बड़े उत्तर में तीन-चार लाइनें ऐसी होती हैं जो पूरे उत्तर को व्यक्त करती हैं। आपको चाहिए कि आप इन लाइनों को अंडरलाइन कर दें। इससे यह होगा कि परीक्षक की नजर तुरंत उन लाइनों पर जाएगी। उनकी आसानी और बढ़ जाएगी। ऐसा करके उत्तर में आपकी कुछ गलतियों (यदि वे होंगी तो) भी छिप जाएंगी।

गणित में उत्तर को बक्से में डाल दें- गणित में प्रत्येक प्रश्न के अंतिम उत्तर के चारों ओर बक्सा बनाकर उसे घेर दें। इससे परीक्षक की नजर तुरंत उत्तर पर जाएगी और उन्हें अंक देने में आसानी होगी।

नया उत्तर नए पृष्ठ से शुरू करें- मान लिया कि आपका उत्तर किसी पृष्ठ पर इस प्रकार से खत्म हुआ कि पृष्ठ पर नीचे चार-पांच पंक्तियां खाली रह गईं। अब आपने एक-दो पंक्तियां छोड़कर उसी पृष्ठ पर दूसरे प्रश्न का उत्तर शुरू कर दिया जो अगले पृष्ठ पर जाकर खत्म हुआ। ऐसा न करें। यदि उत्तर एक शब्द या एक पंक्ति का है यानी उन्हीं बची पांच-छह पंक्तियों में खत्म हो जाना वाला है तब तो आप ऐसा कर सकते हैंलेकिन यदि उत्तर बड़ा है और अगले पृष्ठ पर जाकर खत्म होगा तो ऐसे उत्तर की शुरुआत अगले पेज से ही करें।

6-जितना पूछा जाए उतना ही उत्तर दें


परीक्षा में छात्रों को लिखना ज्यादा होता है, जबकि समय कम होता है। ऐसे में जल्दबाजी स्वाभाविक होती हैलेकिन इस चक्कर में कई बार ऐसी गलती हो जाती है कि बना बनाया काम बिगड़ जाता है।

अक्सर छात्र जल्दी से प्रश्न पढ़ते हैं और उसके किसी एक ऐसे अंश को पढ़कर उत्तर देना शुरू कर देते हैं। वे पूरे प्रश्न को पढ़कर यह नहीं देखते कि वास्तव में पूछा क्या जा रहा है। उदाहरण के रूप में कोई छात्र किसी प्रश्न में परिभाषा या डिफाइन शब्द देखता हैं और फिर जल्दी से यह देखता है कि किसकी परिभाषा की बात हो रही है। इसके बाद वह तुरंत ही उत्तर लिखना शुरू कर देता है, जबकि प्रश्न में परिभाषा लिखने को नहीं कहा जाता है। प्रश्न यह है कि फलां प्रक्रिया की सही परिभाषा देने का श्रेय किस व्यक्ति को जाता हैउत्तर में केवल उस व्यक्ति का नाम भर ही लिखना होता हैलेकिन छात्र परिभाषा लिखने बैठ जाता है।

आप ऐसा बिल्कुल भी न करें। प्रश्न को कई बार पढ़ें और देखें कि उसमें कहीं कोई पेंच या घुमाव तो नहीं है। नहीं यानी नॉट का प्रयोग करके कहीं पूरे प्रश्न का भाव तो नहीं बदल दिया गया है।

कभी-कभी किसी प्रश्न में कई हिस्से होते हैं। ऐसे में पूरा प्रश्न ध्यान से नहीं पढ़ने पर छात्रों से यह गलती हो जाती है कि वे बस प्रश्न के एक हिस्से का उत्तर देकर आगे बढ़ जाते हैं। आप ऐसा न करें। अगर प्रश्न में दिया गया है व्हेन एंड व्हेयर (कब और कहां) तो आपको दो उत्तर देने होंगे। बताना होगा कि कोई घटना कब और कहां हुई। आपको दोनों उत्तर पता होते हैं लेकिन लापरवाही से प्रश्न पढ़ने पर आप अक्सर एक हिस्से का उत्तर छोड़ देते हैं और अपने अंक गंवा देते हैं।

किसी प्रश्नपत्र में सभी प्रश्न करने अनिवार्य होते हैं तो किसी में विकल्प भी होते हैं। किसी प्रश्नपत्र में यह व्यवस्था होती है कि प्रत्येख खंड से निश्चित संख्या में ही प्रश्नों के उत्तर देने होते हैं। ऐसे में प्रश्नपत्र की शुरुआत में दिए गए निर्देशों को ध्यान से पढ़ना जरूरी हो जाता है। निर्देशों को पढ़ने में जरा सी चूक होने पर आप अपना बड़ा नुकसान कर सकते हैं।

7-प्रश्नकर्ता की इच्छा का ध्यान रखें


प्रश्न को ध्यान से पढ़कर देखें कि प्रश्नकर्ता आपसे क्या जानना चाहता है। अगर आपने प्रश्नकर्ता की इच्छानुसार उत्तर नहीं दिया तो आपको अंक गंवाने पड़ेंगे। यदि प्रश्न में डिफाइन लिखा है तो परिभाषा ही लिखिए और कुछ नहीं। यदि आंसर ब्रीफली लिखा है तो संक्षेप में ही उत्तर दीजिए विस्तार से नहीं। यदि एक्सप्लेन लिखा है तो ठीक से व्याख्या करिए। यहां एक शब्द या एक पंक्ति के उत्तर से काम नहीं चलेगा। यदि कंपेयर लिखा है तो दोनों चीजों की तुलना करें। यदि गिव रीजन लिखा है तो कारण बताए बिना पूरे अंक नहीं मिलेंगे। यदि उदाहरण भी देने को कहा गया है तो केवल परिभाषा से पूरे अंक नहीं मिलेंगे। आपको उदाहरण भी देना होगा।
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पढ़ाई करने का सबसे अच्छा तरीका क्या है?


मेरी नजर में यदि निम्नलिखित तरीके से पढ़ाई की जाए तो पढ़ाई बोझ नहीं लगेगी। पढ़ाई में मजा भी आएगा और परीक्षा में नंबर भी अच्छे आएंगे।

1- अपनी सुविधानुसार रोजाना कम से कम दो घंटे पढ़ाई के लिए समर्पित करें। यह नियम टूटना नहीं चाहिए। यानी दो घंटे केवल पढ़ाई, और कुछ नहीं। यदि ज्यादा समय दे सकें तो और भी अच्छा।

2- खुद की भाषा में खुद के नोट्स बनाएं। पढ़ाई में कभी मात नहीं खाएंगे। इससे न केवल चैप्टर की मुख्य बातें आपको स्वयं ही याद होती जाएंगी बल्कि आपकी लेखनी भी सुधरेगी।

3- हर चैप्टर का एक संक्षिप्त नोट्स भी बनाएं। जैसे किसी फिल्म की कहानी आप अपने दोस्त को संक्षेप में बताते हैं, उसी प्रकार हर चैप्टर का ऐसा बिंदुवार शारांश बनाएं जो केवल एक पेज में आ जाए।

4- सप्ताह के अंत में जो भी अब तक पढ़ा या लिखा गया, उसे दोहराने का काम जरूर करें।

5- हम दोस्तों के साथ बहुत सारी फालतू की बातें करते हैं। कोशिश करें कि बातचीत में पढ़ाई भी शामिल हो जाए। इसके लिए सबसे अच्छा तरीका यह है कि बारी-बारी से तय करें कि फलां तारीख को रोहित, फलां तारीख को राहुल, फलां तारीख को अंकिता फलां चैप्टर पर दोस्तों को लैक्चर देगा/देगी। मैंने कई दोस्तों को ऐसा करते देखा है और इस प्रकार से वाकई चैप्टर काबू में आ जाते हैं।

6- मोबाइल का लाभ उठाएं। किसी चैप्टर की मुख्य बातों को अच्छे से पढ़ते हुए अपनी आवाज में रिकार्ड कर लें। इसके बाद पढ़ाई के समय से अलग भी जब भी फुरसत मिले, रिकार्डिंग ऑन करके सुनें। अपनी आवाज सुनने का आनंद भी आएगा और चैप्टर याद भी हो जाएगा।

6- शरीर पर भी ध्यान दें। रोजाना दौड़ें और व्यायाम करें। पौष्टिक भोजन करें ताकि शरीर पढ़ाई के लिए तैयार रहे।


लव कुमार सिंह


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