How To Get Good Marks
अनेक छात्रों के साथ यह देखने को मिलता है कि स्कूल, कॉलेज या विश्वविद्यालय स्तर की परीक्षा के लिए वे खूब मेहनत करते हैं, लेकिन फिर भी उनके उतने अंक नहीं आते, जितने की उन्हें आशा होती है। ऐसा भी देखने को मिलता है कि एक जैसी मेहनत करने वाले दो छात्रों के अंकों में काफी अंतर होता है।
ऐसा क्यों होता है? इस समस्या के पीछे मुख्य कारण यह है कि विषय को समझने और जरूरी चीजें याद कर लेने के बावजूद कुछ छात्र परीक्षा में स्वयं को सही से प्रस्तुत नहीं कर पाते। परीक्षा कक्ष में उत्तर देते समय उनसे कुछ ऐसी गलतियां हो जाती है, जिससे उनके अंक कम रह जाते हैं। किसी छात्र का थोड़ा कमजोर उत्तर भी बेहतर प्रस्तुति के कारण अच्छे अंक दिला सकता है और कई बार बेहतर उत्तर भी कमजोर प्रस्तुति के कारण वैसा काम नहीं कर पाता है।
इस समस्या को दूर करने के लिए छात्रों को परीक्षा कक्ष की रणनीति और उसके बाद कॉपी जांचने वाले परीक्षक की मनोस्थिति को समझना चाहिए और फिर उसी के अनुसार अपने उत्तर देने चाहिए। किसी भी छात्र को परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन के लिए निम्नलिखित बातों पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए-
1- परीक्षक का मूड बना देती है अच्छी लेखनी
जब कोई परीक्षक किसी परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाएं जांचता है तो उसके और छात्र के बीच केवल एक ही संपर्क बिंदु होता है और वह है छात्र की लेखनी। सुंदर तरीके से लिखा गया थोड़ा कमजोर उत्तर भी छात्र को अच्छे अंक दिलवा सकता है, जबकि भद्दे तरीके से लिखा गया ठोस उत्तर भी नंबर कटवा सकता है। इसलिए परीक्षा में अच्छे अंक लाने के लिए अच्छी लेखनी बहुत जरूरी है।
2- यदि लेखनी बहुत सुंदर नहीं है तो यह जरूर करें
- लेखनी सुंदर नहीं है तब भी प्रत्येक शब्द और पंक्तियों के बीच में पर्याप्त जगह रखें ताकि प्रत्येक शब्द और पंक्ति परीक्षक को स्पष्ट नजर आए।
- दो उत्तरों के बीच में भी थोड़ी जगह छोंड़ें ताकि साफ-साफ पता चले कि यह किस प्रश्न का उत्तर है।
- जब किसी प्रश्न का उत्तर खत्म हो जाए तो उसे यूं ही न छोड़ें, बल्कि उसके नीचे एक लाइन खींच दें ताकि स्पष्ट नजर आए कि उत्तर यहां खत्म हो गया है। लाइन कागज के मध्य में दोनों तरफ स्थान छोड़कर खींचें। लाइन की जगह छोटे-छोटे पांच-छह गोले, बक्से या सितारे भी बना सकते हैं। इन संकेतों को बाद थोड़ी सी जगह छोड़ें और फिर अगले उत्तर को शुरू करें।
- हर उत्तर को शुरू करने से पहले ऊपर मध्य में या बाएं तरफ अंकित करें कि यह किस प्रश्न का उत्तर है।
- जहां भी जरूरी हो, वहां शीर्षक दें और उन्हें मोटे अक्षरों में लिखें या उनके नीचे लाइन खींचें।
- ध्यान आकर्षित करने के लिए शीर्षकों को कैपिटल लेटर यानी मोटे अक्षरों में भी लिख सकते हैं।
- जहां भी जरूरी हो, वहां चित्र, ग्राफ आदि का प्रयोग करें।
- यदि किसी उत्तर में कई बिंदु हैं तो उन्हें एक साथ एक पंक्ति में न लिखकर अलग-अलग पंक्ति में ऊपर-नीचे क्रम संख्या डालकर लिखें।
- उत्तरों के बीच में क्रम दिखाने के लिए उचित स्थानों पर अंकों या बुलेट का समुचित प्रयोग करें।
- किसी खास वाक्य या बिंदु को अंडरलाइन करने से भी नहीं चूकें।
3- मॉडल पेपर लेकर अभ्यास करें
ऊपर बताए गए सभी उपायों को अमल में लाने के लिए मॉडल पेपर लेकर घर पर उसका बिल्कुल परीक्षा की तरह अभ्यास करें। उत्तर लिखने के लिए पूरी सख्ती के साथ स्वयं को उतना ही समय दें, जितना परीक्षा में मिलने वाला है। अक्सर ऐसा होता है कि जब हमें कम समय में ज्यादा लिखना होता है तो तेज लिखते समय हमारी लेखनी बिगड़ जाती है। घर में अभ्यास से तेजी से लिखने की आदत बनेगी और परीक्षा में लेखनी बिगड़ने की समस्या नहीं आएगी।
4- वर्तनी की गलतियां न होने दें
परीक्षा में स्पैलिंग यानी वर्तनी की गलतियां बिल्कुल भी न होन दें। ऐसी गलतियां कागज पर एकदम से नजर आ जाती है और एक अच्छे उत्तर का भी गुड़गोबर कर देती हैं। वर्तनी की गलतियां देखकर परीक्षक के मस्तिष्क पर बहुत बुरा असर पड़ता है। ऐसी गलतियां उसे चिड़चिड़ा बना देती हैं। कुल मिलाकर ऐसी गलतियां होने से सही उत्तर होने पर भी अच्छे अंक नहीं मिल पाते हैं।
5- परीक्षक फ्रेंडली उत्तर दें
परीक्षक को कॉपी जांचने में आसानी होती है तो छात्र को लाभ होता है। इसीलिए, उत्तरों का और उत्तर देने के तरीकों का परीक्षक के अनुकूल होना जरूरी है।
दरअसल, जिन उत्तरों को समझने और याद करने के लिए आप पूरे वर्ष कठिन मेहनत करते हैं और परीक्षा हाल में तीन घंटे जूझकर उत्तर देते हैं, उन उत्तरों की उत्तर पुस्तिका का फैसला कुछ ही मिनटों में हो जाता है। परीक्षक के सामने कॉपियों का ढेर होता है और उन्हें एक कॉपी को जांचने के लिए कुछ ही मिनट मिलते हैं। ऐसे में क्या किया जाए कि छात्र अपने भविष्य के लिए मिले कुछ मिनटों में परीक्षक पर ऐसा प्रभाव छोड़ दें कि छात्र को अच्छे अंक ही मिलें।
इसका एक ही तरीका है कि आप प्रश्नों का इस प्रकार से दें कि आपकी कॉपी जांचते समय परीक्षक के मस्तिष्क पर कम से कम दबाब पड़े। आपकी कॉपी परीक्षक को चिड़चिड़ा न बनाए। कुल मिलाकर आपको अपने उत्तरों को परीक्षक फ्रेंडली बनाना है।
कॉपी जांचते समय परीक्षक के पास मॉडल उत्तर भी होते हैं। ऐसे में परीक्षक सामान्यतः उत्तरों को पूरा नहीं पढ़ते बल्कि यह देखते हैं कि जो कुछ उत्तर में लिखा गया है वह मॉडल उत्तर से कितना मिलता जुलता है। भाषा के प्रश्नपत्रों को छोड़कर ज्यादातर प्रश्नपत्रों में कमोबेश यही स्थिति होती है।
परीक्षक फ्रेंडली उत्तर देने के लिए आप परीक्षा हाल में निम्न तरीके अपनाएं-
जिस क्रम में प्रश्न हैं, उसी क्रम में उत्तर दें- कुछ प्रश्नपत्र दो या तीन खंडों में बंटे होते हैं, जबकि कुछ प्रश्नपत्रों में कोई खंड नहीं होता है। प्रश्नपत्र जैसा भी हो, आप कोशिश करें कि अपने उत्तरों का क्रम वही रखें जो क्रम प्रश्नपत्र का है। यदि प्रश्नपत्र खंडों में बंटा है तो आप पहले जवाब देने के लिए किसी एक खंड को चुन सकते हैं, लेकिन आप जो भी खंड चुनें उसमें उत्तरों का क्रम न बदलें। उसी क्रम में उत्तर दें जिस क्रम में प्रश्न आए हैं। प्रश्नपत्र जैसा ही उत्तरों का क्रम देखकर परीक्षक को बड़ी राहत मिलती है। इससे परीक्षक को उत्तर की पहचान करने में बिल्कुल भी देरी नहीं लगती और उसका काम आसान हो जाता है।
उत्तर के महत्वपूर्ण अंश को अंडरलाइन कर दें- प्रत्येक उत्तर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। किसी भी बड़े उत्तर में तीन-चार लाइनें ऐसी होती हैं जो पूरे उत्तर को व्यक्त करती हैं। आपको चाहिए कि आप इन लाइनों को अंडरलाइन कर दें। इससे यह होगा कि परीक्षक की नजर तुरंत उन लाइनों पर जाएगी। उनकी आसानी और बढ़ जाएगी। ऐसा करके उत्तर में आपकी कुछ गलतियों (यदि वे होंगी तो) भी छिप जाएंगी।
गणित में उत्तर को बक्से में डाल दें- गणित में प्रत्येक प्रश्न के अंतिम उत्तर के चारों ओर बक्सा बनाकर उसे घेर दें। इससे परीक्षक की नजर तुरंत उत्तर पर जाएगी और उन्हें अंक देने में आसानी होगी।
नया उत्तर नए पृष्ठ से शुरू करें- मान लिया कि आपका उत्तर किसी पृष्ठ पर इस प्रकार से खत्म हुआ कि पृष्ठ पर नीचे चार-पांच पंक्तियां खाली रह गईं। अब आपने एक-दो पंक्तियां छोड़कर उसी पृष्ठ पर दूसरे प्रश्न का उत्तर शुरू कर दिया जो अगले पृष्ठ पर जाकर खत्म हुआ। ऐसा न करें। यदि उत्तर एक शब्द या एक पंक्ति का है यानी उन्हीं बची पांच-छह पंक्तियों में खत्म हो जाना वाला है तब तो आप ऐसा कर सकते हैं, लेकिन यदि उत्तर बड़ा है और अगले पृष्ठ पर जाकर खत्म होगा तो ऐसे उत्तर की शुरुआत अगले पेज से ही करें।
6-जितना पूछा जाए उतना ही उत्तर दें
परीक्षा में छात्रों को लिखना ज्यादा होता है, जबकि समय कम होता है। ऐसे में जल्दबाजी स्वाभाविक होती है, लेकिन इस चक्कर में कई बार ऐसी गलती हो जाती है कि बना बनाया काम बिगड़ जाता है।
अक्सर छात्र जल्दी से प्रश्न पढ़ते हैं और उसके किसी एक ऐसे अंश को पढ़कर उत्तर देना शुरू कर देते हैं। वे पूरे प्रश्न को पढ़कर यह नहीं देखते कि वास्तव में पूछा क्या जा रहा है। उदाहरण के रूप में कोई छात्र किसी प्रश्न में परिभाषा या डिफाइन शब्द देखता हैं और फिर जल्दी से यह देखता है कि किसकी परिभाषा की बात हो रही है। इसके बाद वह तुरंत ही उत्तर लिखना शुरू कर देता है, जबकि प्रश्न में परिभाषा लिखने को नहीं कहा जाता है। प्रश्न यह है कि फलां प्रक्रिया की सही परिभाषा देने का श्रेय किस व्यक्ति को जाता है? उत्तर में केवल उस व्यक्ति का नाम भर ही लिखना होता है, लेकिन छात्र परिभाषा लिखने बैठ जाता है।
आप ऐसा बिल्कुल भी न करें। प्रश्न को कई बार पढ़ें और देखें कि उसमें कहीं कोई पेंच या घुमाव तो नहीं है। नहीं यानी नॉट का प्रयोग करके कहीं पूरे प्रश्न का भाव तो नहीं बदल दिया गया है।
कभी-कभी किसी प्रश्न में कई हिस्से होते हैं। ऐसे में पूरा प्रश्न ध्यान से नहीं पढ़ने पर छात्रों से यह गलती हो जाती है कि वे बस प्रश्न के एक हिस्से का उत्तर देकर आगे बढ़ जाते हैं। आप ऐसा न करें। अगर प्रश्न में दिया गया है व्हेन एंड व्हेयर (कब और कहां) तो आपको दो उत्तर देने होंगे। बताना होगा कि कोई घटना कब और कहां हुई। आपको दोनों उत्तर पता होते हैं लेकिन लापरवाही से प्रश्न पढ़ने पर आप अक्सर एक हिस्से का उत्तर छोड़ देते हैं और अपने अंक गंवा देते हैं।
किसी प्रश्नपत्र में सभी प्रश्न करने अनिवार्य होते हैं तो किसी में विकल्प भी होते हैं। किसी प्रश्नपत्र में यह व्यवस्था होती है कि प्रत्येख खंड से निश्चित संख्या में ही प्रश्नों के उत्तर देने होते हैं। ऐसे में प्रश्नपत्र की शुरुआत में दिए गए निर्देशों को ध्यान से पढ़ना जरूरी हो जाता है। निर्देशों को पढ़ने में जरा सी चूक होने पर आप अपना बड़ा नुकसान कर सकते हैं।
7-प्रश्नकर्ता की इच्छा का ध्यान रखें
प्रश्न को ध्यान से पढ़कर देखें कि प्रश्नकर्ता आपसे क्या जानना चाहता है। अगर आपने प्रश्नकर्ता की इच्छानुसार उत्तर नहीं दिया तो आपको अंक गंवाने पड़ेंगे। यदि प्रश्न में डिफाइन लिखा है तो परिभाषा ही लिखिए और कुछ नहीं। यदि आंसर ब्रीफली लिखा है तो संक्षेप में ही उत्तर दीजिए विस्तार से नहीं। यदि एक्सप्लेन लिखा है तो ठीक से व्याख्या करिए। यहां एक शब्द या एक पंक्ति के उत्तर से काम नहीं चलेगा। यदि कंपेयर लिखा है तो दोनों चीजों की तुलना करें। यदि गिव रीजन लिखा है तो कारण बताए बिना पूरे अंक नहीं मिलेंगे। यदि उदाहरण भी देने को कहा गया है तो केवल परिभाषा से पूरे अंक नहीं मिलेंगे। आपको उदाहरण भी देना होगा।
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पढ़ाई करने का सबसे अच्छा तरीका क्या है?
मेरी नजर में यदि निम्नलिखित तरीके से पढ़ाई की जाए तो पढ़ाई बोझ नहीं लगेगी। पढ़ाई में मजा भी आएगा और परीक्षा में नंबर भी अच्छे आएंगे।
1- अपनी सुविधानुसार रोजाना कम से कम दो घंटे पढ़ाई के लिए समर्पित करें। यह नियम टूटना नहीं चाहिए। यानी दो घंटे केवल पढ़ाई, और कुछ नहीं। यदि ज्यादा समय दे सकें तो और भी अच्छा।
2- खुद की भाषा में खुद के नोट्स बनाएं। पढ़ाई में कभी मात नहीं खाएंगे। इससे न केवल चैप्टर की मुख्य बातें आपको स्वयं ही याद होती जाएंगी बल्कि आपकी लेखनी भी सुधरेगी।
3- हर चैप्टर का एक संक्षिप्त नोट्स भी बनाएं। जैसे किसी फिल्म की कहानी आप अपने दोस्त को संक्षेप में बताते हैं, उसी प्रकार हर चैप्टर का ऐसा बिंदुवार शारांश बनाएं जो केवल एक पेज में आ जाए।
4- सप्ताह के अंत में जो भी अब तक पढ़ा या लिखा गया, उसे दोहराने का काम जरूर करें।
5- हम दोस्तों के साथ बहुत सारी फालतू की बातें करते हैं। कोशिश करें कि बातचीत में पढ़ाई भी शामिल हो जाए। इसके लिए सबसे अच्छा तरीका यह है कि बारी-बारी से तय करें कि फलां तारीख को रोहित, फलां तारीख को राहुल, फलां तारीख को अंकिता फलां चैप्टर पर दोस्तों को लैक्चर देगा/देगी। मैंने कई दोस्तों को ऐसा करते देखा है और इस प्रकार से वाकई चैप्टर काबू में आ जाते हैं।
6- मोबाइल का लाभ उठाएं। किसी चैप्टर की मुख्य बातों को अच्छे से पढ़ते हुए अपनी आवाज में रिकार्ड कर लें। इसके बाद पढ़ाई के समय से अलग भी जब भी फुरसत मिले, रिकार्डिंग ऑन करके सुनें। अपनी आवाज सुनने का आनंद भी आएगा और चैप्टर याद भी हो जाएगा।
6- शरीर पर भी ध्यान दें। रोजाना दौड़ें और व्यायाम करें। पौष्टिक भोजन करें ताकि शरीर पढ़ाई के लिए तैयार रहे।
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