What is citizen journalism? What are the possibilities and challenges of citizen journalism?
· नागरिक पत्रकारिता से अर्थ भागीदारी पर आधारित एक ऐसी पत्रकारिता से है जिसमे आम नागरिक स्वयं सूचनाओं के संकलन, विश्लेषण, रिपोर्टिंग और उनके प्रकाशन-प्रसारण की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
· किन्हीं ऐसे तथ्यों और समाचार की साधारण रिपोर्टिंग नागरिक पत्रकारिता हो सकती है, जिसकी बड़े मीडिया संस्थानों द्वारा उपेक्षा की गई हो।
· इसके अतिरिक्त बड़े मीडिया संस्थानों को किसी नागरिक द्वारा भेजी गई कोई सूचना, रिपोर्ट या वीडियो क्लिप आदि भी नागरिक पत्रकारिता के तहत आते हैं।
· नागरिक पत्रकारिता में सूचना के प्रसार के लिए ज्यादातर इंटरनेट का प्रयोग किया जाता है।
· इंटरनेट पर नागरिक पत्रकारिता के लिए निजी वेबसाइट, ब्लॉग, माइक्रोब्लॉग, सोशल मीडिया मंच आदि का प्रयोग किया जाता है।
· नागरिक पत्रकारिता की अवधारणा को स्पष्टता के साथ सामने लाने वाली शेन बाउमैन और क्रिस विलिस की मशहूर रिपोर्ट 'वी मीडिया : हाउ ऑडियंसेज आर सेपिंग द फ्यूचर ऑफ न्यूज एंड इन्फार्मेशन’ के अनुसार-
· नागरिकों की ''इस भागीदारी का उद्देश्य स्वतंत्र, विश्वसनीय, तथ्यपूर्ण, व्यापक और प्रासंगिक सूचनाएं मुहैया कराना है जो कि एक लोकतंत्र की मांग होती है।
नागरिक पत्रकारिता में पत्रकार की भूमिका आम नागरिक निभाते हैं। | मुख्यधारा की पत्रकारिता में पत्रकार की भूमिका प्रोफेशनल पत्रकार निभाते हैं। |
· आमतौर पर ये वे नागरिक होते हैं जिन्हें मुख्यधारा का मीडिया नजरअंदाज करता रहा है या जिनके सरोकारों, मुद्दों और समस्याओं को उसमें पर्याप्त जगह नहीं मिलती रही है।
· एक तरह से यह नागरिकों की ओर से मुख्यधारा के मीडिया में हस्तक्षेप है। इसके साथ ही यह वैकल्पिक मीडिया मंचों का निर्माण भी है।
· नागरिक पत्रकारिता किसी एक व्यक्ति के सरोकार से भी संचालित हो सकती है। इसके अतिरिक्त वह नागरिकों के संगठित समूहों के सरोकारों से भी प्रेरित हो सकती है।
· बुनियादी बात यह है कि नागरिक पत्रकारिता मुख्यधारा के मीडिया में मौजूद ‘लोकतांत्रिक घाटे’ (डेमोक्रेटिक डेफिसिट) और व्यावसायिक दबावों के कारण आम नागरिको और वास्तविक मुद्दों की उपेक्षा के जवाब में पैदा हुई है।
नागरिक पत्रकारिता की संभावनाएं
· मुख्यधारा के मीडिया के कारपोरेटीकरण और तथाकथित प्रोफेशनलिज्म के कारण उसके अंदर एक ढांचागत कठोरता (रिजीडिटी) और अहं की भावना पैदा हुई है। इससे समाचार माध्यमों के अंदर बैठे पत्रकार खुद को हर तरह की आलोचना, सुधार और परिवर्तन से परे समझने लगे हैं।
· उन्हें लगता है कि वे जिसे समाचार समझते हैं, उसे जिस तरह से प्रस्तुत करते हैं और उसका जिस तरह से विश्लेषण करते हैं, वह न सिर्फ सौ फीसदी सही है बल्कि ऑडियंस को भी उसी तरह से स्वीकार करना चाहिए।
· लेकिन नागरिक पत्रकारिता के आगमन के साथ तीन बातें हुईं-
1- सूचनाओं के स्रोतों का विस्तार हुआ
2- उनके बीच आपसी प्रतियोगिता हुई
3- नए माध्यमों ने इस मनमानीपन के सामने चुनौती प्रस्तुत की।
इसके फलस्वरूप अब मुख्यधारा का कोई पत्रकार किसी घटना को मनमाने या आधे-अधूरे तरीके से रिपोर्ट करके बच नहीं सकता।
· मुख्यधारा के मीडिया के लिए अब किसी घटना, मुद्दे, समस्या और विचार को नजरअंदाज करना या ब्लैकऑउट करना भी संभव नहीं रह गया है।
· दुनिया में ऐसे उदाहरणों की कमी नहीं है जब मुख्यधारा के मीडिया द्वारा समाचारों के ब्लैकऑउट या उन्हें तोड़मरोड़ कर पेश करने को नागरिक पत्रकारों ने वैकल्पिक माध्यमों-ब्लॉग्स आदि के जरिए चुनौती दी है।
· नागरिक पत्रकारों ने जानेमाने समाचार संगठनों के प्रोफेशनल पत्रकारों की रिपोर्टों और लेखों में तथ्यात्मक अशुद्धियों, उनके पूर्वाग्रहों, राजनीतिक झुकावों और व्यावसायिक दबावों को न सिर्फ उजागर किया है बल्कि उसे सार्वजनिक चर्चा और विचार-विमर्श का मुद्दा बनाने में सफलता प्राप्त की।
· इराक के मामले में अमेरिकी समाचार माध्यमों की भूमिका पर सबसे पहले नागरिक पत्रकारों ने सवाल खड़े किए और उन्हें चुनौती दी। इराक के बारे में सबसे अधिक तथ्यपूर्ण और आंखे खोल देनेवाली रिपोर्टें मुख्यधारा के समाचार माध्यमों के जरिए नहीं बल्कि एक नागरिक पत्रकार दाहर जमाल के ब्लॉग्स के जरिए सामने आई हैं।
· इस मायने में नागरिक पत्रकारिता मुख्यधारा के मीडिया के लोकतांत्रिकरण के आंदोलन का हिस्सा है। उसने आम पाठकों/दर्शकों/श्रोताओं को सक्रिय बनाया है और उनके अंदर मीडिया की एक समझ भी पैदा की है। इस सक्रियता और समझ के साथ ये पाठक/दर्शक/श्रोता मुख्यधारा के मीडिया में हस्तक्षेप कर रहे हैं और अपने अपने सरोकारों के लिए जगह की मांग कर रहे है।
· दक्षिण कोरिया में ‘ओहमाइन्यूज’ नागरिक पत्रकारिता का व्यावसायिक रूप से भी एक सफल उदाहरण है। फरवरी 2000 में ओह युन-हो ने इसकी स्थापना की थी और इसका ध्येय वाक्य है- “हर नागरिक एक रिपोर्टर है।” ‘ओहमाइन्यूज’ की कुल सामग्री में से लगभग 80 फीसदी उन हजारों नागरिक पत्रकारों से आती है जो देश के कोने-कोने में और दुनिया के विभिन्न देशों में फैले हुए है। 20 प्रतिशत सामग्री इसमें काम करनेवाले प्रोफेशनल पत्रकारों द्वारा लिखी जाती है।
· नागरिक पत्रकारिता का एक और रूप वे ब्लॉग्स हैं जिनमें व्यक्तिगत से लेकर विभिन्न क्षेत्रों और व्यवसायों के सरोकारों को उठाया जा रहा है, उन पर चर्चा हो रही है और कई बार सामूहिक कार्रवाइयां भी हो रही है। ऐसे बहुतेरे ब्लॉग भारत में भी सक्रिय हैं।
· मुख्यधारा के मीडिया में नागरिक पत्रकारिता का हस्तक्षेप कई रूपों में सामने आ रहा है। उसका एक रूप तो यह है कि समाचार माध्यम अपने वेबसाइट पर कुछ रिपोर्टों, लेखों, संपादकियों और खबरों को पाठकों की टिप्पणियों के लिए खोल रहे हैं। पाठक इन रिपोर्टों आदि को पढ़ने के बाद उस पर अपनी टिप्पणी दर्ज कर सकते हैं। साथ ही अन्य पाठकों की टिप्पणियों पर भी चर्चा कर सकते हैं। इसके अलावा समाचार माध्यम अपने पाठकों को इन रिपोर्टों आदि की रेटिंग करने के लिए भी कह रहे हैं।
· मुख्यधारा के समाचार माध्यमों में इसका एक और रूप भी सामने आ रहा है जिसमें समाचार माध्यम अपने पाठको को अपने किसी प्रोफेशनल रिपोर्टर या लेखक की खबर, रिपोर्ट और फीचर पर न सिर्फ टिप्पणी करने के लिए बल्कि उसमें कुछ नई जानकारियां भी जोड़ने के लिए कह रहे हैं। इसके जरिए समाचार माध्यम दरअसल अपने पाठको और दर्शकों को यह मौका दे रहे हैं कि वे उसकी कवरेज को और व्यापक और सघन बना सकें।
· इस प्रकार नागरिक पत्रकारिता में असीमित संभावनाएं हैं। तमाम चुनौतियों के बावजूद नागरिक पत्रकारिता को अब रोक पाना संभव नहीं है।
नागरिक पत्रकारिता के सामने चुनौतियां
· नागरिक पत्रकारिता की राह इतनी आसान नहीं है। मुख्यधारा के मीडिया ने इसे अपने अंदर समाहित कर लेने के लिए कोशिशें शुरू कर दी हैं।
· कई टीवी चैनल और समाचार पत्र नागरिक पत्रकारिता को प्रोत्साहित कर रहे हैं, लेकिन यह नागरिक पत्रकारिता की लोकतांत्रिक भावना और संघर्ष को जगह देने के बजाय उसके रूप या फार्म को जगह देने की कोशिश है।
· कहने का तात्पर्य यह है कि चैनल द्वारा अपने अलोकतांत्रिक चरित्र और स्वरूप में बदलाव के बजाय प्रतीकात्मक तौर पर कुछ नागरिकों की ओर से भेजी गई किसी बड़ी घटना या मामले की कोई एक्सक्लूसिव वीडियो या फिल्म फुटेज को चैनल पर दिखाने से कोई खास फर्क नहीं पड़नेवाला है।
· नागरिक पत्रकारिता के तहत मुख्यधारा के समाचार चैनलों/समाचार पत्रों का जोर ऐसे अजीबोगरीब, अटपटे और चौंकानेवाले वीडियो क्लिप पर होता है जिसका कोई सार्वजनिक महत्व नहीं होता है। वे एक तरह से अपने दर्शकों को उन्हीं समाचार मानदंडों और सोच के अनुरूप खबरें और वीडियो भेजने के लिए तैयार कर रहे हैं जिसके प्रतिरोध में नागरिक पत्रकारिता खड़ी हुई है।
· वास्तव में मुख्यधारा के मीडिया की कोशिश नागरिक पत्रकारिता को बढ़ावा देने की नहीं बल्कि उसका चतुराई के साथ इस्तेमाल करने की है।
· आमतौर पर जब कोई बड़ी घटना या दुर्घटना होती है तो संयोगवश बहुतेरे दर्शक वहां मौजूद होते हैं और उनमें से कई अपने कैमरा फोन या हैंडीकैम से उसकी तस्वीरे भी उतारने में कामयाब हो जाते है। चूंकि अचानक होनेवाली घटनाओं के समय चैनल के पत्रकार और कैमरा टीमें वहां नहीं होतीं, इसलिए उस समय इस तरह की एमेच्योर वीडियो फुटेज की मांग बढ़ जाती है। यह भी नागरिक पत्रकारिता का एक रूप है लेकिन इसमें नागरिक के विचारों और सरोकारों की भूमिका कम और घटनात्मक संयोग की भूमिका अधिक है।
· इसी का एक और पहलू है जिसमें लोग अपने कैमराफोन या हैंडीकैम के जरिए सेलिब्रीटीज की तस्वीरें क्लिक करते हैं और समाचार चैनल उन्हें खुशी के साथ दिखाते भी है। लेकिन यह नागरिक पत्रकारिता का विकृत रूप है। इसीलिए इसे पैपराज्जी की तर्ज पर पीपुलराज्जी भी कहा जाता है।
· यह सेलेब्रिटीज के निजी जीवन में ताकझांक की कोशिश है। इस तरह की विकृत पत्रकारिता का एक चर्चित मामला तब सामने आया था जब कुछ चैनलों ने कैमरा फोन से खींचे गए करीना कपूर और शाहिद कपूर के किसी होटल में चुंबन लेते दृश्य को जोरशोर से दिखाया था।
· एक प्रमुख चैनल ने एक कैमरा फोन से खींची गई एक ऐसी कार की तस्वीरें घंटों दिखाईं जिसके बारे में दावा किया गया कि वह कार बिना ड्राइवर के चल रही है, जबकि चैनल को पहले से पता था कि यह एक ट्रिक है और उसे दिखाकर दर्शकों को मूर्ख बनाया जा रहा है।
· यह एक तरह से दर्शकों को भ्रष्ट बनाने की भी कोशिश है। यह नागरिक पत्रकारिता के लिए एक चुनौती है।
· मुख्यधारा के मीडिया की सबसे बड़ी शिकायत यह है कि नागरिक पत्रकारिता, पत्रकारिता के कई बुनियादी सिद्धांतों जैसे वस्तुनिष्ठता, तथ्यपरकता, निष्पक्षता और संतुलन आदि का ध्यान नहीं रखती है। इसमें कुछ हद तक सच्चाई है।
· कई बार कुछ पाठक ब्लॉग्स आदि में न सिर्फ अश्लील टिप्पणियां करते हैं बल्कि व्यक्तिगत आक्षेप पर भी उतर आते है। इस तरह की प्रवृत्तियों पर अंकुश लगाने के लिए नागरिक पत्रकारिता में सक्रिय गंभीर और ईमानदार लोगों के अलावा गेटकीपरों को आगे आना पड़ेगा। लेकिन इस सब के बावजूद नागरिक पत्रकारिता को अब रोक पाना संभव नहीं है।
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- लव कुमार सिंह
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