मुहावरे और कहावतें
मुहावरा क्या होता है?
मुहावरा वह वाक्यांश होता है जो अपने कहे गए (वाचिक) अर्थ का बोध न कराकर अलंकारिक/प्रतीकात्मक/लाक्षणिक अर्थ का बोध कराता है। साथ ही वह भाषा की सजीवता और अर्थ गौरव बढ़ाता है।
उदाहरण– घी के दिए जलाना
यहां शाब्दिक अर्थ हुआ– घी के दीए जलाना, लेकिन वास्तविक अर्थ है– खुशी मनाना
कुछ और उदाहरण–
- अंगूठा दिखाना– इनकार करना
- अंधे की लकड़ी– एकमात्र सहारा
- अंगारों पर पैर रखना– स्वयं को खतरे में डालना
लोकोक्ति क्या होती है?
लोकोक्ति कही गई ऐसी बात होती है जिसमें जीवन के अनुभवों को संक्षिप्त और अनूठे ढंग से व्यक्त किया गया हो और वह समय की कसौटी पर खरी उतरती हो।
उदाहरण–
- अंधा बांटे रेवड़ी फिर फिर अपनों को दे– स्वार्थी व्यक्ति पक्षपात करता है।
- अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता– अकेला व्यक्ति कुछ नहीं कर सकता।
मुहावरे और कहावत में अंतर
1– मुहावरे वाक्यांश होते है, जबकि कहावत ज्यादातर पूरे वाक्य में होती हैं।
2– मुहावरों का प्रयोग स्वतंत्र रूप से न होकर वाक्य रचना के अनुसार होता है। कहावत पर वाक्य रचना का कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
3– मुहावरे को वाक्य से निकाल दें तो वाक्य निर्जीव हो जाता है। कहावत पूरा वाक्य होता है इसलिए हटाने पर कोई फर्क नहीं पड़ता।
4– बहुत सी कहावतों का संबंध सत्य घटना, प्रसंग या अंतर्कथा से होता है यानी इनकी उत्पत्ति के पीछे कोई प्रसंग या घटना होती है जिससे प्रेरित होकर वह कहावत चलन में आती है। उधर, मुहावरों का संबंध किसी सत्य घटना, प्रसंग या अंतर्तकथा से नहीं होता है।
कुछ प्रचलित मुहावरे
- अंग-अंग ढीला होना- (बहुत थक जाना)- सारा दिन काम करने से मेरा अंग-अंग ढीला हो गया है।
- अन्न-जल उठना- (एक स्थान से दूसरे स्थान पर चले जाना)- रिटायर होने पर प्रोफेसर बोले- "अब तो यहां से हमारा अन्न-जल उठ गया बच्चों। अब हम अपने गांव में जाकर रहेंगे।"
- अन्न-जल बदा होना- (कहीं जाना और रहना अनिवार्य हो जाना)- हमारा अन्न-जल तो मेरठ में ही बदा है।
- अपने मुंह मियां मिट्ठू बनना- (अपनी प्रशंसा करना)- राजू मुझे इसलिए अच्छा नहीं लगता क्योंकि वह अपने मुंह मियां मिट्ठू बनता रहता है।
- अक्ल के घोड़े दौड़ाना- (केवल कल्पनाएं करते रहना)- सफलता अक्ल के घोड़े दौड़ाने से नहीं, परिश्रम से मिलती है।
- अंगारे उगलना- (क्रोध में लाल-पीला होना)- अभिमन्यु की मृत्यु से आहत अर्जुन कौरवों पर अंगारे उगलने लगे।
- अंगारे बरसना- (कड़ी धूप होना)- जून के महीने में अंगारे बरस रहे थे और मैं पसीने से लथपथ था।
- अधर काटना- (बेबसी का भाव प्रकट करना)- पुलिस द्वारा बेटे की पिटाई करते देख पिता ने अपने अधर काट लिये।
- अर्थ से फर्श तक- (आकाश से भूमि तक)- अमेरिका अपने दुश्मन को समाप्त करने के लिये अर्श से फर्श तक का जोर लगा देता है।
- आग पर तेल छिड़कना- (और भड़काना)- बहुत से लोग सुलह कराने के बजाय आग पर तेल छिड़कने में माहिर होते हैं।
- आग पर पानी डालना- (झगड़ा मिटाना)- विवाद को बढ़ान से कोई लाभ नहीं है। आग पर पानी डालने में ही समझदारी है।
- आसमान टूटना- (विपत्ति आना)- भाई और भतीजे की मृत्यु का समाचार सुनकर मुख्यमंत्री जी पर आसमान टूट पड़ा।
- ईंट से ईंट बजाना- (नष्ट-भ्रष्ट कर देना)- पृथ्वीराज की सेना ने दुश्मन की ईंट से ईंट बजा दी।
- एक तो करेला और दूसरा नीम चढ़ा- (एक साथ दो-दो दोष होना)- हमारे समाज में एक तो जातिवाद हैै, दूसरे अंधविश्वास भी बहुत ज्यादा है। स्थिति एक तो करेला और दूसरा नीम चढ़ा जैसी है, इसलिये व्यवस्था में बदलाव बहुत कठिन है।
- जहर का घूंट पीना- (कड़ी और कड़वी बात सुनकर भी चुप रहना)- जरूरतमंद व्यक्ति बेबस होता है। उसे जहर का घूंट पीना ही पड़ता है।
- ठन-ठन गोपा (पैसा पास न होना)- अधिक खर्च करने वाले महीने के अंत में ठन-ठन गोपाल हो जाते हैं।
- तीन तेरह होना- (बिखर जाना)- पुलिस के लाठीचार्ज करते ही आंदोलनकारी तीन तेरह हो गए।
- थोथा चना बाजे घना- (अकर्मण्य व्यक्ति बात अधिक करता है)- राजेश थोथा चना बाजे घना जैसा है। वह आपके लिए कुछ नहीं करेगा लेकिन बातें दुनिया भर की करेगा।
- दांत काटी रोटी- (घनिष्ठ मित्रता)- किसी समय मेरी उससे दांत काटी रोटी थी।
- दांत खट्टे करना- (पराजित करना)- टेस्ट सीरीज में भारत ने आस्ट्रेलिया की टीम के दांत खट्टे कर दिये।
- देवता कूच कर जाना- (घबरा जाना)- पुलिस की पूछताछ से पहले ही नौकर के देवता कूच कर गये।
- धोती ढीली होना- (घबरा जाना)- जंगल में भालू देखते ही उसकी धोती ढीली हो गई।
- निन्यानवे के फेर में पड़ना (धन संग्रह की चिंता में पड़ना)- व्यापारी तो हमेशा निन्यानवे के फेर में लगे रहते हैं।
- नहले पर दहला मारना (करारा जवाब देना)- शर्मा जी ने गुप्ता जी के नहले पर दहला मारा, तब जाकर वे सहमत हुए।
- पेट में दाढ़ी होना- (चालाक होना)- रमेश से तुम कोई लाभ नहीं उठा सकते। उसके तो पेट में दाढ़ी है।
(मुहावरों की संख्या असंख्य है। छात्र कोई भी हिंदी की अच्छी सी पुस्तक लेकर अन्य मुहावरों का अध्ययन करें।)
कुछ प्रचलित कहावतें
- अब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गई खेत- अवसर निकल जाने के बाद पछताना व्यर्थ होता है।
- अधजल गगरी छलकत जाय- कम ज्ञान, धन, सम्मान वाले व्यक्ति अधिक प्रदर्शन करते हैं।
- अभी दिल्ली दूर है- अभी कसर है।
- आंख का अंधा नाम नयनसुख- नाम के विपरीत गुण होना।
- आंख के अंधे गांठ के पूरे- मूर्ख किंतु धनी।
- आगे नाथ न पीछे पगहा- बिल्कुल स्वतंत्र।
- आसमान से गिरा खजूर में अटका- एक आपत्ति के बाद दूसरी आपत्ति का आ जाना।
- आम के आम गुठलियों के दाम- दोहरा फायदा होना।
- आई तो रोजी नहीं तो रोजा- कमाया तो खाया नहीं तो भूखे।
- इधर कुंआ उधर खाई- हर हालत में मुसीबत होना।
- इन तिलों में तेल नहीं- किसी भी लाभ की संभावना नहीं होना।
- काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती- अन्याय बार-बार नहीं चलता।
(कहावतों की संख्या असंख्य है। छात्र कोई भी हिंदी की अच्छी सी पुस्तक लेकर अन्य कहावतों का अध्ययन करें।)
दो जून को लेकर एक मुहावरा है- दो जून की रोटी। क्या आप इसका अर्थ जानते हैं?
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