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Monday, 5 June 2023

अलंकार (Figure of Speech)

अलंकार (Figure of Speech)



अलंकार का अर्थ

अलंकार दो शब्दों से मिलकर बना है। एक है- अलम् और दूसरा है- कार

अलम् का अर्थ है- भूषण या सजावट

कार का अर्थ है- करे

इस प्रकार अलंकार का अर्थ है- ऐसे शब्द जो भाषा को सजाए, संवारे, भूषित करे, अलंकार है।

अलंकार के प्रकार


अलंकार दो प्रकार के होते हैं-

1- शब्दालंकार- 

जब शब्द प्रयोग से भाषा में चमत्कार उत्पन्न किया जाता है तो शब्दालंकार होता है। इस श्रेणी में अनुप्रास अलंकार, यमक अलंकार और श्लेष अलंकार प्रमुख रूप से आते हैं।

अनुप्रास अलंकार- 

जब किसी वाक्य में एक अक्षर (वर्ण) बार-बार आता है तो वहां अनुप्रास अलंकार होता है। उदाहरण-

- चारु चंद्र की चपल चांदनी चमक रही यमुना जल पर ('च' अक्षर की पुनरावृत्ति)

(चारु का अर्थ होता है- सुंदर)

- कुटिल, कुचाल, कुकर्म छोड़ दे ('क' अक्षर की पुनरावृत्ति)

- रघुपति राघव राजा राम ('र' अक्षर की पुनरावृत्ति)

- मृदु मंद-मंद मंथर मंथर ('म' अक्षर की पुनरावृत्ति)

यमक अलंकार

जब कोई शब्द दो या दो से ज्यादा बार प्रयोग होता है, लेकिन उसका अर्थ अलग होता है तो वहां यमक अलंकार होता है। उदाहरण-

- वर को छोड़ और वर ले लो (एक वर का अर्थ है पति और दूसरे वर का अर्थ है वरदान)

- तीन बेर खाती थीं, वे तीन बेर खाती थीं (एक बार के अर्थ है बार और दूसरे बेर का अर्थ है फल)

- काली घटा का घमंड घटा (एक घटा का अर्थ है बादल और दूसरे घटा का अर्थ है कम होना)

श्लेष अलंकार

जब एक शब्द एक ही बार प्रयोग होता है लेकिन उसके एक से ज्यादा अर्थ होते हैं तो वहां श्लेष अलंकार होता है। उदाहरण- 

- मंगन को देखि पट देत बार-बार है (यहां 'पट' शब्द का एक अर्थ है दरवाजा और दूसरा अर्थ है वस्त्र। अर्थात एक अर्थ हुआ कि भिखारी (मंगन) को देखकर वह दरवाजा बंद कर लेता है और दूसरा अर्थ हुआ भिखारी को देखकर वह वस्त्र देता है।) 

- सुबरन को ढूंढत फिरत कवि, व्यभिचारी, चोर (यहां 'सुबरन' का एक अर्थ है- स्वर्ण यानी सोना, दूसरा अर्थ है- अच्छे शब्द और तीसरा अर्थ है- अच्छा रूप-रंग। अर्थात चोर को सोने की तलाश रहती है, कवि को अच्छे शब्दों की और व्यभिचारी को अच्छे रूप-रंग की।)

पुनरूक्ति अलंकार

पुनरूक्ति दो शब्दों के योग से बना शब्द है। ये शब्द हैं पुन्र और उक्ति। यानी वह उक्ति (कथन) जो बार-बार प्रकट हो। जिस वाक्य में शब्दों की पुनरावृत्ति (दोहराव) होती है यानी एक शब्द दो या दो से ज्यादा बार आता है, लेकिन उस शब्द का अर्थ नहीं बदलता, वहां पुनरूक्ति अलंकार होता है। ध्यान रखने की बात यह है कि यमक अलंकार में भी शब्दों की पुनरावृक्ति होती है यानी एक शब्द दो या दो से अधिक बार आता है, लेकिन यमक अलंकार में हर बार उस शब्द का अर्थ अलग होता है। पुनरुक्ति में दोहराए गए शब्द का अर्थ एक ही रहता है। उदाहरण-

- मीठा-मीठा रस टपकता है।

- सुबह-सुबह काम पर जा रहे हैं।

- ललित-ललित काले घुंघराले

- थल-थल में बसते हैं शिव ही


2- अर्थालंकार- 

जब कथन और विशिष्ट अर्थ के जरिये भाषा में चमत्कार उत्पन्न किया जाता है तो वहां अर्थालंकार होता है।  इस श्रेणी में उपमा अलंकार, रूपक अलंकार, उत्प्रेक्षा अलंकार, मानवीकरण अलंकार और अतिश्योक्ति अलंकार प्रमुख रूप से आते हैं।

उपमा अलंकार

जब किसी वस्तु या प्राणी को दूसरी प्रसिद्ध वस्तु या प्राणी के समान बताया जाता है तो वहां उपमा अलंकार होता है। इस अलंकार का प्रयोग करने के लिए यानी तुलना करने के लिये 'सा', 'सी', 'सम', 'जैसा' पदों का प्रयोग होता है। इसलिए ये इस अलंकार की पहचान हैं। उदाहरण-

- फूल सी कोमल बच्ची (बच्ची की कोमलता फूल के समान)

- चांद सा चेहरा (चेहरा चांद के समान यानी चांद जैसा सुदंर)

- सावन के बादलों सी उसकी आंखें बरसने लगीं (आंखें सावन के बादलों के समान)

- मजबूत शिला सी दृढ़ छाती (छाती मजूबत शिला के समान)

रूपक अलंकार

जब एक वस्तु या प्राणी को दूसरी प्रसिद्ध वस्तु या प्राणी  के समान बताने के बजाय उसी का रूप दे दिया जाता है तो वहां रूपक अलंकार होता है। यानी यहां किसी वस्तु या प्राणी को किसी अन्य के जैसा नहीं बताया जाता बल्कि सीधे उसी का रूप दे दिया जाता है। उदाहरण

- मैया मैं तो चंद्र खिलौना लैहों (चंद्रमा जैसा खिलौना नहीं चाहिए बल्कि खिलौना के रूप में चंद्रमा ही चाहिए)

- मुख चंद्रमा है (मुख चंद्रमा के समान नहीं है बल्कि चंद्रमा ही है।)

- विज्ञान-यान पर चढ़ी सभ्यता डूबने जाती है (विज्ञान को यान का रूप दिया गया है)

- पायो जी मैंने राम रतन धन पायो (राम जैसा रतन धन नहीं बल्कि राम ही रतन धन हैं।)

उत्प्रेक्षा अलंकार

जब किसी वस्तु या प्राणी की दूसरी वस्तु या प्राणी के रूप में कल्पना या संभावना व्यक्त की जाती है तो वहां उत्प्रेक्षा अलंकार होता है। कल्पना के लिये 'मानो', 'मनो', 'जानो', 'जैसे' आदि शब्दों का प्रयोग किया जाता है। यानी ये इस अलंकार की पहचान वाले शब्द भी हैं। उदाहरण-

- उस काल मारे क्रोध के तनु कांपने उसका लगा/मानो हवा के जोर से सोता हुआ सागर जगा

- मुख मानो चंद्रमा है (मुख चंद्रमा जैसा नहीं है, मुख चंद्रमा नहीं है, कल्पना करो कि मुख चंद्रमा है)

- सिर फट गया उसका, मानो अरुण रंग का रंग का घड़ा

मानवीकरण अलंकार

जब किसी जड़ (निर्जीव) वस्तु को मानवीय भावनाओं या मानवीय क्रिया का रूप दे दिया जाता तो वहां मानवीकरण अलंकार होता है। यानी यहां निर्जीव वस्तुएं मानव की तरह व्यवहार करती हैं। उदाहरण-

- मेघ आए बड़े बन-ठन के संवर के (सजना-संवरना मनुष्य की क्रिया है। यहां यह काम बादल कर रहे हैं)

- आसमान से उतर रही संध्या सुंदरी धीरे-धीरे

- फूल हंसे, कलियां मुस्काईं (हंसने मुस्कराने का काम मनुष्य करता है, लेकिन यहां फूल और कलियां यह कर रहे हैं)

अतिश्योक्ति अलंकार

जब किसी वस्तु, पदार्थ या कथन का वर्णन लोक सीमा से बढ़कर किया जाए तो वहां अतिश्योक्ति अलंकार होता है। यानी यहां वर्णन इस प्रकार से होता है तो मनुष्य की सीमाओं से परे होता है। उदाहरण-

- हनुमान की पूंछ में, लगन न पाई आग/लंका सारी जल गई, गए निशाचर भाग (पूंछ में आग लगने से पहले ही लंका नहीं जल सकती, लेकिन यहां हनुमान जी की शक्ति को बतान के लिये ऐसा प्रयोग किया गया है। )

- राणा ने सोचा इस पार, तब तक चेतक था उस पार (सोचते ही घोड़ा नदी के पार नहीं पहुंच सकता, लेकिन ये पंक्तियां बताती हैं कि राणा का घोड़ा चेतक बहुत तेज था।)

- इतना रोया था मैं उस दिन, ताल-तलैया सब भर डाले (रोने से ताल-तलैया नहीं भर सकते, लेकिन यहां अर्थ है कि बहुत ज्यादा रोया।)

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Thursday, 1 June 2023

मुहावरे और कहावतें : क्या आप 'दो जून की रोटी' का मतलब जानते हैं?

मुहावरे और कहावतें



मुहावरा क्या होता है?

मुहावरा वह वाक्यांश होता है जो अपने कहे गए (वाचिक) अर्थ का बोध न कराकर अलंकारिक/प्रतीकात्मक/लाक्षणिक अर्थ का बोध कराता है। साथ ही वह भाषा की सजीवता और अर्थ गौरव बढ़ाता है।

उदाहरण– घी के दिए जलाना

यहां शाब्दिक अर्थ हुआ– घी के दीए जलाना, लेकिन वास्तविक अर्थ है– खुशी मनाना

कुछ और उदाहरण–

- अंगूठा दिखाना– इनकार करना

- अंधे की लकड़ी– एकमात्र सहारा

- अंगारों पर पैर रखना– स्वयं को खतरे में डालना

लोकोक्ति क्या होती है?

लोकोक्ति कही गई ऐसी बात होती है जिसमें जीवन के अनुभवों को संक्षिप्त और अनूठे ढंग से व्यक्त किया गया हो और वह समय की कसौटी पर खरी उतरती हो।

उदाहरण–

- अंधा बांटे रेवड़ी फिर फिर अपनों को दे– स्वार्थी व्यक्ति पक्षपात करता है।

- अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता–  अकेला व्यक्ति कुछ नहीं कर सकता।

मुहावरे और कहावत में अंतर

1– मुहावरे वाक्यांश होते है, जबकि कहावत ज्यादातर पूरे वाक्य में होती हैं।

2– मुहावरों का प्रयोग स्वतंत्र रूप से न होकर वाक्य रचना के अनुसार होता है। कहावत पर वाक्य रचना का कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

3– मुहावरे को वाक्य से निकाल दें तो वाक्य निर्जीव हो जाता है। कहावत पूरा वाक्य होता है इसलिए हटाने पर कोई फर्क नहीं पड़ता।

4– बहुत सी कहावतों का संबंध सत्य घटना, प्रसंग या अंतर्कथा से होता है यानी इनकी उत्पत्ति के पीछे कोई प्रसंग या घटना होती है जिससे प्रेरित होकर वह कहावत चलन में आती है। उधर, मुहावरों का संबंध किसी सत्य घटना, प्रसंग या अंतर्तकथा से नहीं होता है।

कुछ प्रचलित मुहावरे

- अंग-अंग ढीला होना- (बहुत थक जाना)- सारा दिन काम करने से मेरा अंग-अंग ढीला हो गया है।

- अन्न-जल उठना- (एक स्थान से दूसरे स्थान पर चले जाना)- रिटायर होने पर प्रोफेसर बोले- "अब तो यहां से हमारा अन्न-जल उठ गया बच्चों। अब हम अपने गांव में जाकर रहेंगे।"

- अन्न-जल बदा होना- (कहीं जाना और रहना अनिवार्य हो जाना)- हमारा अन्न-जल तो मेरठ में ही बदा है।

- अपने मुंह मियां मिट्ठू बनना- (अपनी प्रशंसा करना)- राजू मुझे इसलिए अच्छा नहीं लगता क्योंकि वह अपने मुंह मियां मिट्ठू बनता रहता है।

- अक्ल के घोड़े दौड़ाना- (केवल कल्पनाएं करते रहना)- सफलता अक्ल के घोड़े दौड़ाने से नहीं, परिश्रम से मिलती है।

- अंगारे उगलना- (क्रोध में लाल-पीला होना)- अभिमन्यु की मृत्यु से आहत अर्जुन कौरवों पर अंगारे उगलने लगे।

- अंगारे बरसना- (कड़ी धूप होना)- जून के महीने में अंगारे बरस रहे थे और मैं पसीने से लथपथ था।

- अधर काटना- (बेबसी का भाव प्रकट करना)- पुलिस द्वारा बेटे की पिटाई करते देख पिता ने अपने अधर काट लिये।

- अर्थ से फर्श तक- (आकाश से भूमि तक)- अमेरिका अपने दुश्मन को समाप्त करने के लिये अर्श से फर्श तक का जोर लगा देता है।

- आग पर तेल छिड़कना- (और भड़काना)- बहुत से लोग सुलह कराने के बजाय आग पर तेल छिड़कने में माहिर होते हैं।

- आग पर पानी डालना- (झगड़ा मिटाना)- विवाद को बढ़ान से कोई लाभ नहीं है। आग पर पानी डालने में ही समझदारी है।

- आसमान टूटना- (विपत्ति आना)- भाई और भतीजे की मृत्यु का समाचार सुनकर मुख्यमंत्री जी पर आसमान टूट पड़ा।

- ईंट से ईंट बजाना- (नष्ट-भ्रष्ट कर देना)- पृथ्वीराज की सेना ने दुश्मन की ईंट से ईंट बजा दी।

- एक तो करेला और दूसरा नीम चढ़ा- (एक साथ दो-दो दोष होना)- हमारे समाज में एक तो जातिवाद हैै, दूसरे अंधविश्वास भी बहुत ज्यादा है। स्थिति एक तो करेला और दूसरा नीम चढ़ा जैसी है,  इसलिये व्यवस्था में बदलाव बहुत कठिन है।

- जहर का घूंट पीना- (कड़ी और कड़वी बात सुनकर भी चुप रहना)- जरूरतमंद व्यक्ति बेबस होता है। उसे जहर का घूंट पीना ही पड़ता है।

- ठन-ठन गोपा (पैसा पास न होना)- अधिक खर्च करने वाले महीने के अंत में ठन-ठन गोपाल हो जाते हैं।

- तीन तेरह होना- (बिखर जाना)- पुलिस के लाठीचार्ज करते ही आंदोलनकारी तीन तेरह हो गए।

- थोथा चना बाजे घना- (अकर्मण्य व्यक्ति बात अधिक करता है)- राजेश थोथा चना बाजे घना जैसा है। वह आपके लिए कुछ नहीं करेगा लेकिन बातें दुनिया भर की करेगा।

- दांत काटी रोटी- (घनिष्ठ मित्रता)- किसी समय मेरी उससे दांत काटी रोटी थी।

- दांत खट्टे करना- (पराजित करना)- टेस्ट सीरीज में भारत ने आस्ट्रेलिया की टीम के दांत खट्टे कर दिये।

- देवता कूच कर जाना- (घबरा जाना)- पुलिस की पूछताछ से पहले ही नौकर के देवता कूच कर गये।

- धोती ढीली होना- (घबरा जाना)- जंगल में भालू देखते ही उसकी धोती ढीली हो गई।

- निन्यानवे के फेर में पड़ना (धन संग्रह की चिंता में पड़ना)- व्यापारी तो हमेशा निन्यानवे के फेर में लगे रहते हैं।

- नहले पर दहला मारना (करारा जवाब देना)- शर्मा जी ने गुप्ता जी के नहले पर दहला मारा, तब जाकर वे सहमत हुए।

- पेट में दाढ़ी होना- (चालाक होना)- रमेश से तुम कोई लाभ नहीं उठा सकते। उसके तो पेट में दाढ़ी है।

(मुहावरों की संख्या असंख्य है। छात्र कोई भी हिंदी की अच्छी सी पुस्तक लेकर अन्य मुहावरों का अध्ययन करें।)

कुछ प्रचलित कहावतें

- अब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गई खेत- अवसर निकल जाने के बाद पछताना व्यर्थ होता है।

- अधजल गगरी छलकत जाय- कम ज्ञान, धन, सम्मान वाले व्यक्ति अधिक प्रदर्शन करते हैं।

- अभी दिल्ली दूर है- अभी कसर है।

- आंख का अंधा नाम नयनसुख- नाम के विपरीत गुण होना।

- आंख के अंधे गांठ के पूरे- मूर्ख किंतु धनी।

- आगे नाथ न पीछे पगहा- बिल्कुल स्वतंत्र।

- आसमान से गिरा खजूर में अटका- एक आपत्ति के बाद दूसरी आपत्ति का आ जाना।

- आम के आम गुठलियों के दाम- दोहरा फायदा होना।

- आई तो रोजी नहीं तो रोजा- कमाया तो खाया नहीं तो भूखे।

- इधर कुंआ उधर खाई- हर हालत में मुसीबत होना।

- इन तिलों में तेल नहीं- किसी भी लाभ की संभावना नहीं होना।

- काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती- अन्याय बार-बार नहीं चलता।

(कहावतों की संख्या असंख्य है। छात्र कोई भी हिंदी की अच्छी सी पुस्तक लेकर अन्य कहावतों का अध्ययन करें।)

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दो जून को लेकर एक मुहावरा है- दो जून की रोटी। क्या आप इसका अर्थ जानते हैं? 

दो जून की रोटी का अर्थ है दो वक्त या समय की रोटी यानी सुबह और शाम का भोजन। यह अवधि भाषा का शब्द है जिसका अर्थ समय से है। इसे इस प्रकार से वाक्यों में प्रयोग किया जाता है- कड़ी मेहनत के बाद भी उसे दो जून की रोटी मयस्सर नहीं होती। 

- लव कुमार सिंह

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